अनाथ बच्चों की असंवेदनशील सरकारें, केजरीवाल और ममता को केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कैसे दिखाया आईना

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इसमें उन्‍होंने लिखा, ‘दिल्ली और बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने फटकार लगाई कि कोविड के दौरान जो बच्चे अनाथ हुए या जिनका एक अभिभावक चल बसा, उनकी सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

प्रमुख खबरें: नई दिल्ली। एक डेटा के मुताबिक 9346 ऐसे बच्चे हैं जो कोरोना महामारी (corona period) के कारण बेसहारा और अनाथ हो गए हैं या फिर अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया है। बच्चों की परवरिश के लिए सरकारों ने योजनाओं की घोषणा की लेकिन इस पर अमलीजामा नहीं पहनाया जा सके।

अनाथ बच्चों की असंवेदनशीलता पर दिल्ली और बंगाल सरकार केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) के निशाने पर आ गई। जावड़ेकर ने एक मुद्दे पर एक ट्वीट (Tweet) किया, इसमें उन्‍होंने लिखा, ‘दिल्ली और बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने फटकार लगाई कि कोविड के दौरान जो बच्चे अनाथ हुए या जिनका एक अभिभावक चल बसा, उनकी सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। बाल स्वराज पोर्टल पर भी यह जानकारी नहीं है…इससे बड़ा आईना आपको क्या चाहिए केजरीवाल और ममता।’

बता दें कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) भी कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अनाथ हुए बच्‍चों के मामले में बंगाल और दिल्‍ली सरकार की आलोचना कर चुका है। आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो (Priyank Kanungo) ने कहा सोमवार को कहा था कि कोरोना वारयरस संक्रमण के कारण अनाथ हुए बच्चों को लेकर पश्चिम बंगाल और दिल्ली की सरकारों का रवैया असंवेदनशील है क्योंकि इन्होंने इन बच्चों के संदर्भ में अब तक पूरी जानकारी मुहैया नहीं कराई है।

बच्चों के उपचार की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर सभी राज्यों को बच्चों के उपचार की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। कानूनगो ने कहा था, अनाथ बच्चों की मदद को लेकर कई राज्य सरकारों ने तेजी से काम किया है, यह अच्छा संकेत है कि हम बच्चों की मदद के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। अफसोस की बात है कि पश्चिम बंगाल और दिल्ली दो राज्य ऐसे हैं, जहां इन बच्चों का सर्वे नहीं कराया गया और हमें पूरी जानकारी नहीं दी गई है।”उन्होंने कहा, बच्चों के प्रति इन दोनों सरकारों के रवैये को संवेदनशील नहीं कहा जा सकता।”

राज्यों की ओर से SC को  दिया डेटा
एनसीपीसीआर ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 29 मई तक राज्यों की ओर से प्रदान किए गए डेटा के मुताबिक 9346 ऐसे बच्चे हैं जो कोरोना महामारी के कारण बेसहारा और अनाथ हो गए हैं या फिर अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया है। एनसीपीसीआर ने ऐसे बच्चों की जानकारी के लिए वेबसाइट बाल स्वराज’ शुरू किया है जहां राज्य अपने यहां का डेटा उपलब्ध करा सकते हैं। एनसीसीपीसीआर प्रमुख ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स के जरिए इन अनाथ बच्चों की मदद की जो घोषणा की है, उससे इन बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने और संवारने में मदद मिलेगी।

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