नाहन: कच्चा मकान गिरने की कगार पर, परिवार के साथ झोंपड़ी में रहने को मजबूर सतेंद्र

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हितेश शर्मा, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 09 Jun 2021 10:30 AM IST

सार

ग्रामीणों ने सतेंद्र सिंह की मदद को हाथ बढ़ाकर यह झोंपड़ी तैयार की है। सतेंद्र सिंह का कच्चा मकान किसी भी समय गिर सकता है। 

झोंपड़ी में रहने को मजबूर सतेंद्र
– फोटो : अमर उजाला

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 हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में कौलांवाला भूड़ पंचायत के नैरों गांव के सतेंद्र सिंह का परिवार गुरबत भरा जीवन जीने के लिए मजबूर है। हैरानी इस बात की है कि बीपीएल श्रेणी में दर्ज होने के बावजूद भी सरकारी योजना का लाभ आज तक इस परिवार को नहीं मिल पाया। पत्नी और चार बच्चों सहित छह सदस्यों का यह परिवार मजबूरन घास फूस से तैयार झोंपड़ी में रहने को मजबूर है। ग्रामीणों ने सतेंद्र सिंह की मदद को हाथ बढ़ाकर यह झोंपड़ी तैयार की है। 

सतेंद्र सिंह का कच्चा मकान किसी भी समय गिर सकता है। नौरो कोटड़ी वार्ड सदस्य कंवरपाल ने इस झोंपड़ी को तैयार करवाया है। सतेंद्र सिंह के पास छोटी-मोटी खेतीबाड़ी के अलावा आजीविका का कोई साधन नहीं है। सतेंद्र सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में दो साल पहले पंचायत में आवेदन किया था। बीते माह पंचायत सचिव से  मकान की फाइल संबंधी पूछताछ की तो बताया गया कि कागजात संबंधित विभाग को भेजे गए हैं। इस परिवार को पिछले वर्ष जनमंच कार्यक्रम के माध्यम से लंबी जद्दोजहद के बाद पीने का पानी मुहैया हो पाया था।

हालांकि, अब पानी की समस्या खत्म हो चुकी है, लेकिन इस परिवार को आज भी पक्के मकान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सतेंद्र सिंह का कच्चा मकान अब रहने लायक नहीं बचा है। मकान का कुछ हिस्सा पहले गिर चुका है। पंचायत प्रधान रीतु देवी ने बताया कि सतेंद्र सिंह बीपीएल श्रेणी में है। पक्के मकान के लिए आवेदन भेजा गया है। बीडीओ अनूप कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रक्रिया पूरी कर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया है। फिर भी परिवार की अन्य साधनों से मदद के प्रयास किए जाएंगे। 

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में कौलांवाला भूड़ पंचायत के नैरों गांव के सतेंद्र सिंह का परिवार गुरबत भरा जीवन जीने के लिए मजबूर है। हैरानी इस बात की है कि बीपीएल श्रेणी में दर्ज होने के बावजूद भी सरकारी योजना का लाभ आज तक इस परिवार को नहीं मिल पाया। पत्नी और चार बच्चों सहित छह सदस्यों का यह परिवार मजबूरन घास फूस से तैयार झोंपड़ी में रहने को मजबूर है। ग्रामीणों ने सतेंद्र सिंह की मदद को हाथ बढ़ाकर यह झोंपड़ी तैयार की है। 

सतेंद्र सिंह का कच्चा मकान किसी भी समय गिर सकता है। नौरो कोटड़ी वार्ड सदस्य कंवरपाल ने इस झोंपड़ी को तैयार करवाया है। सतेंद्र सिंह के पास छोटी-मोटी खेतीबाड़ी के अलावा आजीविका का कोई साधन नहीं है। सतेंद्र सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में दो साल पहले पंचायत में आवेदन किया था। बीते माह पंचायत सचिव से  मकान की फाइल संबंधी पूछताछ की तो बताया गया कि कागजात संबंधित विभाग को भेजे गए हैं। इस परिवार को पिछले वर्ष जनमंच कार्यक्रम के माध्यम से लंबी जद्दोजहद के बाद पीने का पानी मुहैया हो पाया था।

हालांकि, अब पानी की समस्या खत्म हो चुकी है, लेकिन इस परिवार को आज भी पक्के मकान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सतेंद्र सिंह का कच्चा मकान अब रहने लायक नहीं बचा है। मकान का कुछ हिस्सा पहले गिर चुका है। पंचायत प्रधान रीतु देवी ने बताया कि सतेंद्र सिंह बीपीएल श्रेणी में है। पक्के मकान के लिए आवेदन भेजा गया है। बीडीओ अनूप कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रक्रिया पूरी कर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया है। फिर भी परिवार की अन्य साधनों से मदद के प्रयास किए जाएंगे। 

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