बेतिया में तीसरी बार मिली सकरमाउथ कैटफिश: देखने के लिए लोगों की उमड़ी भीड़, अमेरिका के अमेजन नदी में पाई जाती है यह मछली

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बेतिया2 मिनट पहले

गंदगी ही है सकरमाउथ कैटफिश का भोजन

बेतिया में इन दिनों सकरमाउथ कैटफिश मछली को लेकर काफी चर्चा है। यह दुर्लभ मछली रविवार को नवलपुर ओपी थाना क्षेत्र अंतर्गत ढढ़वा पंचायत के दूधियावा गांव के बॉर्डर पर स्थित रोहुआ नदी में मछली पकड़ने के दौरान एक मछुआरे को मिला।

गंदगी है इसकी भोजन

जलीय जीव मामलों के जानकारों का कहना है कि सकरमाउथ कैटफिश का मुख्य भोजन गंदा पदार्थ, काई या मच्छर है। यदि इस मछली को किसी गंदे पानी के टैंक में रख दिया जाए तो यह काई और गंदगी को साफ कर सकता है।

मछली को देखने के लिए लोगों की उमड़ी भीड़

मछली को अपने घर ले गया मछुआरा

बताया जा रहा है कि मछुआरे ने जैसे ही नदी में जाल फेंका कि और जाल में एक अजीबो-गरीब मछली फंस गया। यह देखते ही मछुआरे चौंक गए और मछली को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। मछुआरा बिकाऊ चौधरी ने मछली को अपने घर ले गया। जब लोगों ने मछली के बारे में गूगल पर सर्च किया तो पता चला कि इस मछली का नाम सकरमाउथ कैटफीश है। मछुआरे ने मछली को अपने घर में सुरक्षित रखा हुआ है।

अमेरिका में पाए जाती यह मछली

जनकारों का कहना है कि यह सकर माउथ कैटफिश मछली खासकर साउथ अमेरिका के अमेजन नदी और समुद्र में पाए जाते हैं। यह दुर्लभ प्रजाति की मछली है। यह मछली गहरे पानी की जगह नदी के किनारे किसी पत्थर से या किसी पेड पौधे से चिपक कर रहता है। यह पानी में तैरने के जगह किसी एक जगह स्थिर रहता है।

अमेजन नदी में पाई जाती है यह मछली

अमेजन नदी में पाई जाती है यह मछली

बगहा और चौतरवा में भी मिला था

इससे पूर्व बगहा के बनचहरी गांव में हरहा नदी में यह मछली मिली थी। उससे पूर्व चौतरवा में यह मछली मिल चुकी है। हाल के दिनों में तीन जगहों से मछली मिलने पर विशेषज्ञ गंडक नदी में इसकी संख्या बढ़ता हुआ देख रहे हैं। इससे नदी के इको सिस्टम को प्रभावित होने का खतरा है। कारण कि मछली मांसाहारी है। ग्रामीण रामचंद्र चौधरी, लालबच्चन चौधरी, हीरामन कुमार ने बताया कि इस प्रजाति की मछली अपने यहां नहीं पाई जाती है। लेकिन एक्वेरियम में पालकर लोग बड़ा होने पर इसे नदी में फेंक दे रहे हैं। इससे अब यह मछली यहां भी हर जगह मिल रहा है। पश्चिम चंपारण जिले में ही इस मछली के मिलने की तीसरी घटना है। इससे पूर्व बनारस में भी यह मछली मिली थी।

2003-04 में गंगा में देखी गई थी यह मछली

डब्ल्यूटीआई व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरीय अधिकारी डॉ. समीर कुमार सिन्हा और कमलेश मौर्या ने बताया कि माउथ कैट फिश साउथ अफ्रीका व साउथ अमेरिका में पाई जाती है। लोग इसे पालने के लिए लाए थे। बाद में कुछ लोगों ने इसे नदियों में छोड़ दिया। इस मछली का प्रजनन तेजी से होता है। मछली को वर्ष 2003-04 में गंगा नदी के सर्वे के समय पहली बार देखा गया था। वर्तमान में यह मछली, गंगा, गंडक समेत अन्य नदियों में मौजूद है। सकर माउथ कैट फिश मिलना जलीय जीवों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। इन दिनों गंडक, उससे जुड़ी व अन्य कई नदियों मे काफी मात्रा में यह मछली मिल रही है। जलीय जीवों के लिए काफी यह दयनीय स्थिति साबित हो रहा है। यह मछली अगर मिल रही है तो इस मार देना ही बेहतर है। इसे दोबारा नदी में छोड़ा गया तो तेजी से इनकी संख्या बढ़ जायेगी। इसके बाद सभी जलीय जीव पर खतरा मंडराने लगेगा।

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