Indian Army Chief जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बयान में खुलासा किया कि पाकिस्तान में वर्तमान में 8 आतंकी शिविर सक्रिय हैं। इनमें से 6 कैंप नियंत्रण रेखा (LoC) के पार और 2 अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के पार स्थित हैं। सेना प्रमुख ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन शिविरों से भारत के खिलाफ कोई आतंकी प्रयास किया गया, तो भारतीय सेना कड़ी कार्रवाई करेगी।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में मामूली वृद्धि देखी गई है और सीमा पार से घुसपैठ के प्रयासों की खबरें सामने आ रही हैं। जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना पूरी तरह सतर्क है और किसी भी खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।
ऑपरेशन सिंदूर और सीमा पर तनाव
Indian Army Chie जनरल द्विवेदी का यह बयान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में और महत्वपूर्ण हो जाता है, जो भारत की ओर से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाइयों का हिस्सा माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में भारतीय सुरक्षा बलों ने LoC और IB के साथ कई सफल ऑपरेशन किए हैं, जिसमें आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और घुसपैठिए मार गिराए गए।
सूत्रों के अनुसार, ये 8 शिविर मुख्य रूप से लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अन्य आतंकी संगठनों से जुड़े हैं, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पंजाब के क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं। सेना प्रमुख ने जोर दिया कि खुफिया जानकारी के आधार पर इन शिविरों पर नजर रखी जा रही है और भारत निष्क्रिय नहीं बैठेगा।
इस बयान पर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई यूजर्स और विशेषज्ञों ने पूछा है कि यदि इन कैंपों की लोकेशन ज्ञात है, तो इजरायल की तर्ज पर प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक क्यों नहीं की जा रही? एक यूजर ने टिप्पणी की, “हमला सबसे अच्छा बचाव है… ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है, तो इंतजार क्यों?” जबकि दूसरे ने कहा, “इन कैंपों को जनवरी में ही दिवाली के पटाखे जैसा बना दो।”
कुछ आलोचकों ने इसे केवल बयानबाजी बताया, कहते हुए कि यदि खुफिया जानकारी है तो तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए, न कि किसी हमले का इंतजार। पाकिस्तानी पक्ष से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पिछले अनुभवों से पता चलता है कि ऐसे बयानों के बाद सीमा पर तनाव बढ़ सकता है।
भारत की आतंकवाद विरोधी नीति
भारतीय सरकार और सेना की नीति लंबे समय से ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली रही है। 2016 के उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के पुलवामा हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे ऑपरेशन इसकी मिसाल हैं। जनरल द्विवेदी ने अपने बयान में दोहराया कि भारत शांति चाहता है, लेकिन यदि उकसावा हुआ तो जवाब देने में देरी नहीं करेगा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान न केवल पाकिस्तान को चेतावनी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी संदेश है कि पाकिस्तान आतंकवाद को प्रायोजित कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य मंचों पर भारत बार-बार इस मुद्दे को उठाता रहा है।
हाल के महीनों में जम्मू-कश्मीर में शांति प्रक्रिया के बावजूद कुछ आतंकी घटनाएं हुई हैं, जैसे पहलगाम और अन्य क्षेत्रों में हमले। सेना ने दावा किया है कि ये प्रयास मुख्य रूप से विदेशी आतंकियों द्वारा किए जा रहे हैं, जिन्हें पाकिस्तान से समर्थन मिलता है।
भारतीय सेना ने LoC और IB पर अपनी तैनाती मजबूत की है। ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और ग्राउंड इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। साथ ही, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे शिविरों को पूरी तरह खत्म करना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि पाकिस्तान में नए कैंप बनते रहते हैं। हालांकि, भारत की सक्रिय नीति से घुसपैठ में कमी आई है।
यह बयान गणतंत्र दिवस से पहले आया है, जब सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहती है। सेना प्रमुख की चेतावनी से साफ है कि भारत किसी भी खतरे के लिए तैयार है और आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
जनरल द्विवेदी का यह बयान न केवल सैन्य बलों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि देशवासियों को भी आश्वस्त करेगा कि सीमाएं सुरक्षित हाथों में हैं।






