Indian Passport Ranking में बड़ा सुधार: 2021 में 90वें से 2026 में 80वें स्थान पर पहुंचा

Indian Passport

Indian Passport की वैश्विक रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 के अनुसार, भारत अब 80वें स्थान पर है, जबकि 2021 में यह 90वें स्थान पर था। यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और कई यूजर्स इसे देश की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और कूटनीतिक सफलता का प्रतीक बता रहे हैं।

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा संघ (IATA) के डेटा पर आधारित होता है, जो बताता है कि किसी देश का पासपोर्ट धारक बिना वीजा या ऑन-अराइवल वीजा के कितने देशों में यात्रा कर सकता है। 2026 की रिपोर्ट में भारत के नागरिक 62 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल सुविधा प्राप्त कर सकते हैं, जो पहले की तुलना में बेहतर है।

Indian Passport Ranking : महामारी के बाद की रिकवरी और कूटनीतिक प्रयास

Indian Passport Ranking में यह सुधार मुख्य रूप से कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक यात्रा प्रतिबंधों में ढील और भारत की सक्रिय कूटनीति का परिणाम है। 2020-2021 में महामारी के कारण कई देशों ने वीजा नियम सख्त कर दिए थे, जिससे भारत की रैंकिंग गिरकर 90 तक पहुंच गई थी। अब, जैसे-जैसे दुनिया सामान्य हो रही है, कई देशों ने भारतीय यात्रियों के लिए वीजा नियम आसान किए हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रयासों से यूएई, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया और कुछ यूरोपीय देशों में भारतीयों को बेहतर सुविधाएं मिली हैं। इसके अलावा, भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, जी-20 की मेजबानी और वैश्विक मंचों पर सक्रिय भूमिका ने भी पासपोर्ट की प्रतिष्ठा को मजबूत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ नीति और पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंधों का नतीजा है।

सोशल मीडिया पर इस खबर को सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। कई यूजर्स ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की सफलता बताया, जबकि कुछ ने कहा कि यह महामारी से रिकवरी का सामान्य हिस्सा है। एक यूजर ने लिखा, “मासिव जंप! भारत आगे बढ़ रहा है।”

Indian Passport Ranking समय के साथ उतार-चढ़ाव देखती रही है। 2014 में यह 76वें स्थान पर था, जो यूपीए सरकार के समय की उपलब्धि थी। मध्य 2000 के दशक में यह 70-71 के आसपास पहुंच चुका था। महामारी ने सभी देशों की रैंकिंग प्रभावित की, लेकिन भारत की रिकवरी तेज रही है।

वर्तमान में सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश शीर्ष पर हैं, जहां उनके नागरिक 190 से अधिक देशों में वीजा-फ्री यात्रा कर सकते हैं। भारत अभी भी विकासशील देशों की श्रेणी में है, लेकिन 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था होने के बावजूद 80वां स्थान कई लोगों के लिए संतोषजनक नहीं है। एक विश्लेषक ने कहा, “80वां स्थान शुरुआत है, मंजिल नहीं। हमें और प्रयास करने होंगे ताकि वीजा प्रक्रिया आसान हो और भारतीयों को कम सवालों का सामना करना पड़े।”

Indian Passport Ranking चुनौतियां और आगे की राह

Indian Passport की ताकत केवल संख्या नहीं, बल्कि देश की विश्वसनीयता का संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि रैंकिंग में और सुधार के लिए क्षेत्रीय समझौते, द्विपक्षीय वार्ताएं और हवाई अड्डों पर बेहतर सुविधाएं जरूरी हैं। कुछ आलोचकों ने इसे ‘ऐतिहासिक छलांग’ कहने पर आपत्ति जताई, क्योंकि यह महामारी से पूर्व स्तर की रिकवरी मात्र है।

विदेश मंत्रालय ने इस सुधार को सकारात्मक बताया है और कहा कि भारत वैश्विक गतिशीलता को बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है। आने वाले वर्षों में ई-वीजा सुविधाओं का विस्तार और नए समझौते इस रैंकिंग को और ऊपर ले जा सकते हैं।

यह उपलब्धि भारतीय नागरिकों के लिए गर्व का विषय है, खासकर उन लाखों प्रवासियों और यात्रियों के लिए जो विश्व भर में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। जैसे-जैसे भारत की वैश्विक भूमिका बढ़ेगी, पासपोर्ट की ताकत भी मजबूत होती जाएगी।