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अग्निवीरों की भर्ती में सबसे ज्यादा फायदा उन नौजवानों को हो सकता है जिन्होंने आईटीआई या इससे संबंधित कोई तकनीकी कोर्स किया हो। दरअसल, सेना की नीति यह है कि यदि उम्मीदवार पहले से तकनीकी कोर्स कर चुके होंगे तो भर्ती के बाद होने वाले छह महीने के प्रशिक्षण में उन्हें जल्दी पारंपगत बनाना संभव होगा। सैन्य मामलों के विभाग के सूत्रों ने कहा, वायुसेना और नौसेना में सैनिकों का कार्य पूर्ण रूप से तकनीकी होता है। अग्निवीर को भी तकनीकी काम ही करना होगा। अब तक की व्यवस्था के अनुसार, नौजवानों को भर्ती करने के बाद वायुसेना और नौसेना जरूरतों के हिसाब से प्रशिक्षण देती हैं। लेकिन यदि नौजवानों ने पहले से तकनीकी कोर्स कर रखा है तो उसे अग्निवीर नियुक्त होने के बाद कम समय में प्रशिक्षित करना संभव हो सकेगा।

सेना में जवानों का कार्य तकनीकी और युद्धक दोनों होता है। लेकिन सेना द्वारा निकाली गई भर्तियों में कम से कम दो श्रेणियां तकनीकी हैं जिनमें तकनीकी कोर्स कर चुके नौजवानों के चुने जाने की संभावना ज्यादा होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नौजवानों का तकनीकी ज्ञान का फायदा यह है कि उसे कम समय में प्रशिक्षण देकर भी तैयार किया जा सकेगा क्योकि उसका बेसिक पहले से ही मजबूत है।

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विज्ञापनों में प्रचारित होगा : सेना के सूत्रों ने कहा, भर्ती के लिए निकलने वाले विज्ञापनों में इस बात को प्रचारित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक तकनीकी योग्यता वाले उम्मीदवार भी आवेदन करें।

तकनीकी योग्यता के साथ नौजवानों को सेना में भर्ती के अन्य तय मापदंडों को पूरा करना जरूरी होगा। ये मापदंड पहले की तरह हैं और इनमें कोई रियायत नहीं दी जाएगी।

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