Banke Bihari Prakatyotsav Will Be Celebrated In Vrindavan On 18 November – Mathura: वृंदावन में 18 नवंबर को मनाया जाएगा बांकेबिहारी का प्राकट्योत्सव, मंदिर में तैयारियां शुरू

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बांकेबिहारी मंदिर
– फोटो : अमर उजाला

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मथुरा के वृंदावन में जन-जन के आराध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारी का प्राकट्योत्सव (28 नवंबर) बिहार पंचमी को मनाया जाएगा। महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। इस दौरान ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर और निधिवनराज में अनेक धार्मिक आयोजन होंगे। बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि करीब 479 वर्ष पूर्व मार्गशीर्ष (अगहन) माह की शुक्लपक्ष पंचमी को निधिवनराज में संगीतज्ञ हरिदास की संगीत साधना से प्रकट हुईं श्यामश्यामा की युगल जोड़ी के समन्वित स्वरूप को ही ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के नाम से पुकारते हैं।

वृंदावन में निकलेगी भव्य शोभायात्रा 

उन्होंने बताया कि बिहार पंचमी की सुबह निधिवन में बिहारीजी के प्राकट्यस्थल पर दिव्य अभिषेक के बाद हरिदासजी की बधाई शोभायात्रा नगर भ्रमण करती हुई दोपहर में बिहारीजी मंदिर पहुंचेगी। यहां अभिषेक, भोग, टीका, बधाई, मंगलगान, विशेष आरती आदि के बाद ठाकुरजी को राजभोग धराया जाएगा। आरती के बाद सेवायतजन महोत्सव में शामिल भक्तजनों को आशीष प्रदान करेंगे। नगर के अन्य स्थानों पर भी विविध मनोरथ होंगे।

सात दशक पूर्व शुरू हुई थी शोभायात्रा

लगभग सात दशक पहले बिहार पंचमी का परंपरागत महोत्सव साधारण तरीके से मनाया जाता था। वर्ष 1955 से 58 तक मंदिर की व्यवस्थाएं संभालने वाली प्रबंध कमेटी ने गोस्वामी छबीले वल्लभाचार्य के संयोजन में बांकेबिहारी समारोह परिषद का गठन किया। इसके बाद से महोत्सव में शोभायात्रा निकालने की परंपरा शुरू हुई। धीरे-धीरे विस्तार पाने वाले बिहार पंचमी महोत्सव में भक्तों के साथ बेरीवाला परिवार भी ख़ासा योगदान देता है। पर्व पर पीली पोलिस से सजे मंदिर में पीत पोशाक सहित बहुमूल्य आभूषण धारण करने वाले बिहारीजी को केसरिया पंच मेवायुक्त बादाम हलुआ और मेवा के लड्डुओं का विशेष भोग धराते हैं। 

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मथुरा के वृंदावन में जन-जन के आराध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारी का प्राकट्योत्सव (28 नवंबर) बिहार पंचमी को मनाया जाएगा। महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। इस दौरान ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर और निधिवनराज में अनेक धार्मिक आयोजन होंगे। 

बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि करीब 479 वर्ष पूर्व मार्गशीर्ष (अगहन) माह की शुक्लपक्ष पंचमी को निधिवनराज में संगीतज्ञ हरिदास की संगीत साधना से प्रकट हुईं श्यामश्यामा की युगल जोड़ी के समन्वित स्वरूप को ही ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के नाम से पुकारते हैं।

वृंदावन में निकलेगी भव्य शोभायात्रा 

उन्होंने बताया कि बिहार पंचमी की सुबह निधिवन में बिहारीजी के प्राकट्यस्थल पर दिव्य अभिषेक के बाद हरिदासजी की बधाई शोभायात्रा नगर भ्रमण करती हुई दोपहर में बिहारीजी मंदिर पहुंचेगी। यहां अभिषेक, भोग, टीका, बधाई, मंगलगान, विशेष आरती आदि के बाद ठाकुरजी को राजभोग धराया जाएगा। आरती के बाद सेवायतजन महोत्सव में शामिल भक्तजनों को आशीष प्रदान करेंगे। नगर के अन्य स्थानों पर भी विविध मनोरथ होंगे।

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