‘दंड भी धर्म है…’: नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, कोर्ट ने महाभारत का हवाला देते हुए सुनाया फैसला

‘दंड भी धर्म है…’: नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, कोर्ट ने महाभारत का हवाला देते हुए सुनाया फैसला

मेरठ : मेरठ के चर्चित और सनसनीखेज नीले ड्रम हत्याकांड में बुधवार को जिला अदालत ने दोषियों मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुना दी। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों आरोपियों को मौत की सजा सुनाते हुए कहा, “दंड भी धर्म है।” उन्होंने महाभारत का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि अपराधी को दंड देना भी धर्म का ही हिस्सा है।

घटना का पूरा बैकग्राउंड

मार्च 2025 में मर्चेंट नेवी में कार्यरत सौरभ राजपूत की उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने हत्या कर दी थी। हत्या के बाद दोनों ने सौरभ के शव के टुकड़े कर दिए और उन्हें एक नीले रंग के ड्रम में डालकर सीमेंट से भर दिया। यह मामला तब सामने आया जब मेरठ स्थित घर से सौरभ के शव के अवशेष बरामद किए गए। हत्या के तरीके और शव को ठिकाने लगाने की कोशिश के कारण यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था।

13 महीने चली कानूनी प्रक्रिया

इस मामले में 30 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया था। करीब 13 महीने तक चले मुकदमे में कुल 126 सुनवाई हुईं। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 22 गवाह पेश किए। इनमें हत्या में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए चाकू, नीले ड्रम और अन्य सामान की खरीद से जुड़े लोग, होटल मैनेजर और कैब ड्राइवर शामिल थे। इन गवाहों के जरिए आरोपियों की गतिविधियों और अलग-अलग स्थानों पर उनकी आवाजाही को साबित किया गया। आरोपियों के विभिन्न स्थानों पर ठहरने से संबंधित रिकॉर्ड भी अदालत में पेश किए गए।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

फैसला सुनाने से पहले जज मुस्कुराते हुए कोर्ट में आए। उन्होंने फैसला पढ़ना शुरू करने से पहले अहम टिप्पणी की। जज ने कहा कि महाभारत में दंड को भी धर्म ही बताया गया है। यानी अपराधी को दंड देना धर्म है। अदालत में फैसला सुनाए जाने के दौरान ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगे। दोनों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया था।

परिवार की प्रतिक्रिया

सौरभ की मां ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि बेटे की हत्या के बाद परिवार ने डेढ़ साल तक हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने प्रशासन और गवाहों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने मामले में परिवार का साथ दिया। मां ने पहले भी मांग की थी कि दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाया जाए। परिवार के सदस्यों ने बताया कि अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपियों के चेहरे पर किसी भी प्रकार का पछतावा नजर नहीं आया। वे लगातार नजरें चुराते नजर आए।

सौरभ के बड़े भाई ने बताया कि परिवार ने कभी कोर्ट-कचहरी के चक्कर नहीं काटे थे, लेकिन भाई की हत्या के बाद उन्होंने हर संभव कानूनी लड़ाई लड़ी। इस मुश्किल समय में बचपन के दोस्त अंकित धानक और वकील विजय बहादुर ने उनका साथ दिया।

वकील की प्रतिक्रिया

वकील केके चौबे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सुनवाई के दौरान जज ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराधियों को दंड देना भी धर्म है। उन्होंने अदालत के फैसले को समाज के लिए एक बड़ा संदेश बताया। चौबे के मुताबिक, लालच में आकर करीबी रिश्तों की हत्या करने जैसे जघन्य अपराधों में कठोर सजा मिलनी चाहिए। यह फैसला समाज को संदेश देता है कि जघन्य अपराध करने वालों को कानून के तहत कठोर दंड भुगतना पड़ेगा।

अन्य महत्वपूर्ण बातें

  • हत्या की तारीख: 3 मार्च 2025
  • शव के अवशेष: मेरठ स्थित घर से बरामद
  • आरोप: हत्या के बाद शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में सीमेंट से बंद करना
  • गवाहों की संख्या: 22
  • सुनवाई की संख्या: 126
  • दोषी ठहराने की तारीख: 30 सितंबर 2026
  • सजा की तारीख: 14 अक्टूबर 2026

अदालत ने इस जघन्य अपराध को देखते हुए दोनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। अब यह मामला उच्च अदालत में अपील के लिए जा सकता है।