Cabinet Approves Haryana Land Partnership Policy 2022 – Haryana: अब जमीन देकर किसान बन सकेंगे प्रोजेक्ट में हिस्सेदार, कंपनी में निदेशक बनाने का भी प्रावधान

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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
– फोटो : एएनआई (फाइल)

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हरियाणा में अब किसान अपनी जमीन देकर सरकार, विभाग या विकास एजेंसी के साथ किसी भी प्रोजेक्ट में हिस्सेदार बन सकेंगे। सरकार किसान को जमीन के बदले कलेक्टर रेट पर राशि का भुगतान करेगी। साथ ही उसे प्रोजेक्ट में 50 प्रतिशत तक लाभ का हिस्सेदार बनाया जाएगा। इसके अलावा, अगर किसी किसान की पूरे प्रोजेक्ट में 10 प्रतशित से अधिक भूमि है तो उस भूमि मालिक को कंपनी के बोर्ड में निदेशक बनाया जाएगा। इस संबंध में मंत्रिपरिषद की बैठक में हरियाणा लैंड पार्टनरशिप नीति -2022 को मंजूरी प्रदान की गई है। किसी भी प्रोजेक्ट के लिए विभाग या एजेंसी जमीन की तलाश करेगी। लैंड पार्टनरशिप नीति के तहत भुगतान हर छह महीने के अंतराल में किए जाएंगे। विकास परियोजना के लिए 500 एकड़ तक की समय अवधि तीन वर्ष और 500 एकड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं के लिए यह पांच वर्ष रखी गई है। विकास एजेंसी द्वारा परियोजना के विकास को एक स्पेशल पर्पज व्हीकल द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। प्रदेश में पहले से ही भूमि एकत्रीकरण के लिए राज्य सरकार की ई-भूमि और लैंड पुलिंग नीति चल रही हैं। 

सीईटी में मैरिट वालों को ही मौका: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साफ कर दिया है कि संयुक्त पात्रता परीक्षा में केवल मैरिट वालों को ही मौका मिलेगा। पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार मिशन मैरिट पर काम कर रही है। सीईटी परीक्षा पास करने वाले चार गुणा को ही ग्रुप सी के पदों के लिए बुलाया जाएगा। गौर हो कि प्रदेशभर के युवा इसको लेकर मांग कर रहे हैं कि सीईटी परीक्षा पास करने वाले सभी को ग्रुप सी के पदों के लिए मौका दिया जाए। सरकार ने तय कर रखा है कि सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 50 और शेष श्रेणियों को 40 प्रतिशत अंक लेने वाले को ही पास माना जाएगा लेकिन स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए टॉप के चार गुना ही बुलाया जाएगा।

विस्तार

हरियाणा में अब किसान अपनी जमीन देकर सरकार, विभाग या विकास एजेंसी के साथ किसी भी प्रोजेक्ट में हिस्सेदार बन सकेंगे। सरकार किसान को जमीन के बदले कलेक्टर रेट पर राशि का भुगतान करेगी। साथ ही उसे प्रोजेक्ट में 50 प्रतिशत तक लाभ का हिस्सेदार बनाया जाएगा। इसके अलावा, अगर किसी किसान की पूरे प्रोजेक्ट में 10 प्रतशित से अधिक भूमि है तो उस भूमि मालिक को कंपनी के बोर्ड में निदेशक बनाया जाएगा। 

इस संबंध में मंत्रिपरिषद की बैठक में हरियाणा लैंड पार्टनरशिप नीति -2022 को मंजूरी प्रदान की गई है। किसी भी प्रोजेक्ट के लिए विभाग या एजेंसी जमीन की तलाश करेगी। लैंड पार्टनरशिप नीति के तहत भुगतान हर छह महीने के अंतराल में किए जाएंगे। विकास परियोजना के लिए 500 एकड़ तक की समय अवधि तीन वर्ष और 500 एकड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं के लिए यह पांच वर्ष रखी गई है। विकास एजेंसी द्वारा परियोजना के विकास को एक स्पेशल पर्पज व्हीकल द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। प्रदेश में पहले से ही भूमि एकत्रीकरण के लिए राज्य सरकार की ई-भूमि और लैंड पुलिंग नीति चल रही हैं। 

सीईटी में मैरिट वालों को ही मौका: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साफ कर दिया है कि संयुक्त पात्रता परीक्षा में केवल मैरिट वालों को ही मौका मिलेगा। पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार मिशन मैरिट पर काम कर रही है। सीईटी परीक्षा पास करने वाले चार गुणा को ही ग्रुप सी के पदों के लिए बुलाया जाएगा। गौर हो कि प्रदेशभर के युवा इसको लेकर मांग कर रहे हैं कि सीईटी परीक्षा पास करने वाले सभी को ग्रुप सी के पदों के लिए मौका दिया जाए। सरकार ने तय कर रखा है कि सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 50 और शेष श्रेणियों को 40 प्रतिशत अंक लेने वाले को ही पास माना जाएगा लेकिन स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए टॉप के चार गुना ही बुलाया जाएगा।

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