नई दिल्ली : दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) और मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (MES), रक्षा मंत्रालय के बीच आज एक अहम समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सशस्त्र बलों के लिए सामरिक भूमिगत इंफ्रास्ट्रक्चर के नियोजन, डिजाइन, निर्माण और क्षमता विकास में सहयोग के लिए किया गया है।
MoU पर MES की ओर से मेजर जनरल मनोज ओम्मेन, एसएम, डायरेक्टर जनरल वर्क्स और DMRC की ओर से डॉ. प्रमित कुमार गर्ग, डायरेक्टर (बिजनेस डेवलपमेंट) ने हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर समारोह में DMRC के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. विकास कुमार और MES के इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला, एवीएसएम, एसएम सहित दोनों संगठनों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
साझेदारी का उद्देश्य
इस साझेदारी के तहत MES की सामरिक रक्षा विशेषज्ञता और DMRC की विश्व स्तरीय टनलिंग, भूमिगत इंजीनियरिंग तथा प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन क्षमताओं को मिलाकर देश के महत्वपूर्ण रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो अपनी उन्नत टनलिंग टेक्नोलॉजी और बड़े पैमाने पर भूमिगत प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करने का लंबा अनुभव रखती है, जबकि MES भारतीय सशस्त्र बलों के लिए इंजीनियरिंग और निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी संभालता है।
दोनों पक्षों के बीच यह सहयोग राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह MoU सशस्त्र बलों के लिए आधुनिक और सुरक्षित भूमिगत सुविधाओं के विकास में नई दिशा प्रदान करेगा।
समारोह की प्रमुख बातें
- हस्ताक्षरकर्ता: मेजर जनरल मनोज ओम्मेन (MES) और डॉ. प्रमित कुमार गर्ग (DMRC)
- मौजूद प्रमुख अधिकारी: डॉ. विकास कुमार (MD, DMRC) और लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला (Engineer-in-Chief, MES)
- MoU के मुख्य क्षेत्र: सामरिक भूमिगत इंफ्रास्ट्रक्चर का प्लानिंग, डिजाइन, एक्जीक्यूशन और क्षमता विकास
DMRC ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इसकी जानकारी देते हुए MES को टैग किया और लिखा कि यह साझेदारी रक्षा क्षेत्र में DMRC की विशेषज्ञता का उपयोग करेगी। पोस्ट में दो तस्वीरें भी साझा की गई हैं, जिनमें MoU साइन करते हुए दोनों पक्षों के अधिकारियों की तस्वीरें शामिल हैं।
महत्व और संदर्भ
दिल्ली मेट्रो पिछले कई वर्षों से न सिर्फ दिल्ली-NCR बल्कि देश के अन्य शहरों में भी बेहतरीन मेट्रो परियोजनाओं को पूरा कर रही है। अपनी टनलिंग और भूमिगत निर्माण क्षमता के कारण अब इसे रक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका मिल रही है। MES, जो भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की इंजीनियरिंग जरूरतों को पूरा करता है, के साथ यह साझेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह MoU उन समय में साइन किया गया है जब देश सीमा सुरक्षा, रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक युद्ध प्रणालियों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। भूमिगत इंफ्रास्ट्रक्चर रक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह दुश्मन की नजरों से छिपा रहता है और बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है।
DMRC के इस कदम को रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के साथ बढ़ते सहयोग का हिस्सा माना जा रहा है।





