Gujarat Elections 3 lakh crore debt on BJP ruled Gujarat know status of Health and education sector aap Congress Manifesto – ढाई दशक से BJP शासित गुजरात पर 3 लाख करोड़ का कर्ज, जानें

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गुजरात में चुनावी शोर है। इन्हीं शोर के बीच आम आदमी पार्टी की मुफ्त बिजली, बेरोजगारी भत्ता समेत कई लोकलुभावने वादों की भी जोर-शोर से चर्चा हो रही है। कांग्रेस भी उपहारों की पोटली लेकर मैदान में डटी हुई है। लिहाजा, चुनाव त्रिकोणीय बन गया है। चुनाव के नतीजे चाहे जो हों और जिसके भी पक्ष में हों लेकिन एक बात तो साफ है कि राज्य पर जो भी पार्टी शासन करेगी, उसके लिए आने वाले दिन अच्छे नहीं होंगे क्योंकि ढाई दशक से बीजेपी शासित इस राज्य पर 3.08 लाख करोड़ का कर्ज है जो राज्य के सालाना बजट 2.40 लाख करोड़ से ज्यादा है।

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की नवीनतम रिपोर्ट, जो 31 मार्च, 2022 को जारी की गई थी, में कहा गया है कि गुजरात सरकार का सार्वजनिक ऋण 31 मार्च, 2021 तक 3,08,000 करोड़ रुपये था, और यह 2022-23 के राज्य के 2,40,000 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट से कहीं अधिक है।

आगामी सरकार को किसी भी तरह अपने 3.08 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का 61 फीसदी चुकाना होगा। अधिक चिंताजनक बात यह है कि गुजरात का सार्वजनिक ऋण 2024-25 के अंत तक 4,50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है, जो तीन साल से भी कम की अवधि है। यानी अगली सरकार को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी लड़ाई लड़नी होगी।

गुजरात सरकार देश में एकमात्र “रेवेन्यू सरप्लस” (राजस्व अधिशेष) राज्य होने के लिए अपनी पीठ थपथपाती रही है, लेकिन CAG का कहना है कि  “राज्य ने वित्त वर्ष 2011-12 में ‘शून्य’ राजस्व घाटा लक्ष्य हासिल किया था और उसके बाद 2019-’20 तक लगातार रेवेन्यू सरप्लस की सूचना दी थी। मध्यम अवधि के राजकोषीय नीति में प्रस्तावित 789 करोड़ रुपये के रेवेन्यू सरपल्स के लक्ष्य के मुकाबले राज्य ने 2020-21 में पहली बार 22,548 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा कम किया है।

वैसे तो गुजरात औद्योगिक विकास के मामले में भारत के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक हो सकता है लेकिन, शिक्षा, स्वास्थ्य, शिशु मृत्यु दर, दीर्घायु, लैंगिक समानता, पर्यावरण और अन्य से संबंधित इसके विकास सूचकांक गर्व करने लायक नहीं हैं। आखिरी गुजरात मानव विकास रिपोर्ट 2004 में जारी की गई थी। उसके बाद सरकार ने इसे नहीं लाने का फैसला किया। साफ है कि सरकार उन आंकड़ों को छिपाना चाह रही है, जबकि देश में गुजरात मॉडल का ढोल पीटा जाता रहा है।

हालांकि, एक बात निश्चित है कि गुजरात में भारत के सर्वश्रेष्ठ राज्यों में से एक के रूप में उभरने की क्षमता है। लिहाजा, यह राज्य एक अच्छी सरकार का हकदार है।

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