Haryana: बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में धरना दे रहे विद्यार्थियों के समर्थन में पूर्व सीएम हुड्डा, कही ये बात

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पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को अपनी मांगों के बारे में बताते विद्यार्थी।
– फोटो : अमर उजाला

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रोहतक में बॉन्ड पॉलिसी के खिलाफ एमबीबीएस विद्यार्थियों का धरना बुधवार को भी जारी रहा। पीजीआई के निदेशक कार्यालय के बाहर धरना दे रहे विद्यार्थियों के बीच दोपहर में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहुंचे। यहां उनकी मांगों को जायज ठहराते हुए अपना समर्थन दिया। साथ ही उनका मुद्दा विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया। पूर्व सीएम ने कहा कि सरकार का फैसला नीतिगत तौर पर गलत है। बेतहाशा फीस बढ़ोतरी और बॉन्ड नीति थोपने के चलते मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों को मेडिकल शिक्षा नहीं दिला पाएंगे। इस कारण हरियाणा में दाखिले के इच्छुक विद्यार्थी अन्य राज्यों में पलायन करने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में पांच मेडिकल कॉलेज स्थापित किए।

कैंसर इंस्टीट्यूट और एम्स जैसे राष्ट्रीय महत्व वाले बड़े मेडिकल संस्थान भी स्थापित हुए। इसके बावजूद कांग्रेस ने कभी भी इस तरह का फैसला नहीं लिया। नाममात्र फीस में विद्यार्थियों को मेडिकल की शिक्षा दिलाई गई। क्योंकि, कांग्रेस सरकार शिक्षा को व्यवसाय नहीं, बल्कि जिम्मेदारी समझती है। बीजेपी-जेजेपी सरकार शिक्षा का व्यवसायीकरण कर रही है। उनके साथ पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी, पूर्व विधायक संत कुमार व अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। 

दूसरी तरफ विद्यार्थियों ने कहा कि सरकार शिक्षा, विद्यार्थी व जनहित की सोचे। इसी आधार पर फैसला लेते हुए सभी को राहत पहुंचाए। सरकार हमारे दिए गए अल्टीमेटम से पहले अपना फैसला जारी कर बॉन्ड पॉलिसी को रद्द करे। ऐसा नहीं होने पर विद्यार्थी अपना आंदोलन तेज करेंगे।

मैं अपने हलके का काम करवाने में सक्षम, सीएम के पास क्यों जाऊं : हुड्डा
मैं अपने हलके का काम खुद करवाने में सक्षम हूं। इसलिए मुख्यमंत्री के पास काम लेकर क्यों जाऊं। काम करने के लिए सरकार, मंत्री व अधिकारी बैठे हैं। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बुधवार को जिला बार में वकीलों से मिलने के बाद मीडिया कर्मियों से बातचीत में कही। आदमपुर उपचुनाव जीतने के अगले दिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल रोहतक आए थे। पार्टी के प्रदेश कार्यालय में नेताओं व कार्यकर्ताओं से मिलने के बाद उन्होंने कहा था कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनके पास अपने हलके का काम लेकर कभी नहीं आए। सरकार खुद ही सभी हलकों में बराबर विकास कार्य करवा रही है।

बुधवार को जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा दोपहर करीब साढ़े 12 बजे जिला बार एसोसिएशन के कार्यालय में वकीलों से मिलने पहुंचे तो मीडिया ने इस संबंध में उनसे सवाल किया। इस पर उन्होंने कहा कि हर काम सीएम से कहकर नहीं करवाया जाता। विकास कार्य करने के लिए सरकार, मंत्री व अधिकारी होते हैं। वे इसके लिए ही बैठे हैं।

सरकार पर कटाक्ष करते हुए हुड्डा ने कहा कि पहले हर हलके में 25 करोड़ के काम कराने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में कहा गया कि विधायक को एक बार में पांच करोड़ ही मिलेंगे। इतना ही नहीं, सरकार किसानों की फसल एमएसपी पर नहीं खरीद रही है।

अगर पीआर धान की खरीद बंद की जाती है तो उसका दाम गिरेगा। इसका सीधा नुकसान किसानों को होगा। वहीं, हिमाचल प्रदेश में चुनाव के सवाल पर हुड्डा ने कहा कि वे प्रचार से लौटे हैं। वहां कांग्रेस सत्ता में आएगी।

जिला बार मेरी कर्म स्थली, इसलिए आता हूं बार-बार
पत्रकारों से वार्ता से पहले पूर्व सीएम वकीलों से मिले और कहा कि जिला बार, मेरी कर्मस्थली है। बार की बदौलत ही यहां तक पहुंचा हूं। वकीलों का सदा सहयोग रहा है, इसलिए बार-बार वे जिला बार में आते हैं। हुड्डा ने 10 वकीलों को जिला बार की आजीवन सदस्यता का प्रमाण पत्र भी दिया। साथ ही अपने चैंबर में भी गए। उनके साथ बार के प्रधान लोकेंद्र फोगाट व महासचिव दीपक हुड्डा सहित अन्य वकील थे।

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रोहतक में बॉन्ड पॉलिसी के खिलाफ एमबीबीएस विद्यार्थियों का धरना बुधवार को भी जारी रहा। पीजीआई के निदेशक कार्यालय के बाहर धरना दे रहे विद्यार्थियों के बीच दोपहर में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहुंचे। यहां उनकी मांगों को जायज ठहराते हुए अपना समर्थन दिया। साथ ही उनका मुद्दा विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया। 

पूर्व सीएम ने कहा कि सरकार का फैसला नीतिगत तौर पर गलत है। बेतहाशा फीस बढ़ोतरी और बॉन्ड नीति थोपने के चलते मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों को मेडिकल शिक्षा नहीं दिला पाएंगे। इस कारण हरियाणा में दाखिले के इच्छुक विद्यार्थी अन्य राज्यों में पलायन करने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में पांच मेडिकल कॉलेज स्थापित किए।

कैंसर इंस्टीट्यूट और एम्स जैसे राष्ट्रीय महत्व वाले बड़े मेडिकल संस्थान भी स्थापित हुए। इसके बावजूद कांग्रेस ने कभी भी इस तरह का फैसला नहीं लिया। नाममात्र फीस में विद्यार्थियों को मेडिकल की शिक्षा दिलाई गई। क्योंकि, कांग्रेस सरकार शिक्षा को व्यवसाय नहीं, बल्कि जिम्मेदारी समझती है। बीजेपी-जेजेपी सरकार शिक्षा का व्यवसायीकरण कर रही है। उनके साथ पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी, पूर्व विधायक संत कुमार व अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। 

दूसरी तरफ विद्यार्थियों ने कहा कि सरकार शिक्षा, विद्यार्थी व जनहित की सोचे। इसी आधार पर फैसला लेते हुए सभी को राहत पहुंचाए। सरकार हमारे दिए गए अल्टीमेटम से पहले अपना फैसला जारी कर बॉन्ड पॉलिसी को रद्द करे। ऐसा नहीं होने पर विद्यार्थी अपना आंदोलन तेज करेंगे।

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