Haryana: सेमग्रस्त साढ़े 9 लाख एकड़ भूमि को कृषि योग्य बनाने की कवायद, मांगे 3900 करोड़

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खेतों में पानी की निकासी के लिए भूमिगत पाइप लाइन बिछाती मशीन।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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हरियाणा प्रदेश के 11 जिलों की करीब साढ़े 9 लाख एकड़ सेमग्रस्त भूमि को कृषि योग्य बनाने के लिए हरियाणा भूमि सरंक्षण विभाग ने सरकार से 3900 करोड़ रुपये का बजट मांगा है। इसमें से पहले सबसे अधिक साल्ट वाली 1.70 लाख एकड़ भूमि को सुधारा जाएगा।भूमिगत जल निकास प्रणाली के तहत साल्ट (खारा) युक्त पानी को निकालकर ड्रेन में डाला जाएगा। जिससे तीन साल में साल्ट डेढ़ से तीन मीटर तक जमीन के अंदर चले जाते हैं और ऊपर के साल्ट भूमि से खत्म हो जाते हैं और जमीन दोबारा से उपजाऊ हो जाती है।    

इस विधि के अनुसार भूमि में लगभग एक मीटर नीचे 10-15 सेंटीमीटर व्यास के छिद्र युक्त लोहे या सीमेंट-कंक्रीट के पाइप दबाए जाते हैं। इन पाइपों को मुख्य पाइप लाइन से जोड़कर उस पानी को सैंप (होद)तक पहुंचाया जाता है। वहां से तीन हॉर्सपावर वाले सोलर पंप सेट से उस पानी को ड्रेन में छोड़ा जाता है।

जिससे भूमि का जल स्तर नीचे चला जाता है और साल्ट युक्त पानी बाहर निकाल दिया जाता है। बारिश का पानी जब जमीन में जाता है भूमि के जल में सुधरा हो जाता है। उसके बाद वह पानी कृषि के लिए दोबारा से प्रयोग के योग्य हो जाता है।

विभागीय जानकारी के अनुसार खारे पानी की सबसे अधिक समस्या रोहतक और झज्जर जिले में है।  दोनों जिलों में 50-50 हजार एकड़ भूमि सबसे अधिक सेम ग्रस्त है। भूमि संरक्षण विभाग ने सरकार से इस साल अकेले झज्जर जिले के लिए 450 करोड़ रुपये का बजट मांगा है, ताकि सबसे पहले झज्जर जिले के तीन गांवों की भूमि को सुधारा जा सके। झज्जर जिले के डीघल गांव की 3 हजार एकड़ , बिठला व बिसहान गांव की करीब 500 एकड़ भूमि का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। रोहतक जिले के विभिन्न गांवों की 5650 एकड़ भूमि को सुधारा जा चुका है।

होलेंड से मंगाई गई थी मशीन
प्रदेश सरकार की तरफ से अब तक इस योजना के तहत तीन मशीनें विदेश से मंगवाई गई हैं। इनमें से करनाल में 1996 में पहले मशीन होलेंड से मंगवाई गई थी जो कंडम हो चुकी है। उसके बाद 1999-2000 में दो मशीनें और मंगवाई गई थी। एक मशीन रोहतक जिले के लाखन माजरा व दूसरी मशीन सोनीपत के गढ़वाल गांव की कर्मशलाओं में हैं। ये मशीने गेहूं की कटाई के बाद मध्य मार्च, अप्रैल व मई में खेत खाली होने पर ही काम कर पाती हैं। विभाग ने और मशीनें खरीदने के लिए सरकार को प्रपोजल भेजा हुआ है ताकि यह काम तेजी से पूरा हो सके। 

इन जिलों के लिए बनाई कार्ययोजना
विभाग की तरफ से रोहतक, भिवानी, झज्जर, जींद, सोनीपत, चरखी दादरी, हिसार, फतेहाबाद सिरसा, पलवल व नूहं जिले शामिल हैं। इसके अलावा सोलर ट्यूबवेल विधि के तहत भी पानी की निकासी की जा सकती है। इस विधि से एक-एक एकड़ दूरी पर बोरिंग कर सोलर सिस्टम से चला कर पानी के स्तर को कम किया जा सकता है। 

प्रदेश के 11 जिलों में करीब साढ़े 9 लाख एकड़ भूमि सेमग्रस्त है। इसे कृषि योग्य बनाने के लिए सरकार से करीब 3900 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट सरकार को भेजे हैं। सरकार से जिस प्रकार बजट जारी होगा उसके अनुसार काम शुरू किया जाएगा। – ओपी गोदारा, भूमि संरक्षण अधिकारी, रोहतक।

विस्तार

हरियाणा प्रदेश के 11 जिलों की करीब साढ़े 9 लाख एकड़ सेमग्रस्त भूमि को कृषि योग्य बनाने के लिए हरियाणा भूमि सरंक्षण विभाग ने सरकार से 3900 करोड़ रुपये का बजट मांगा है। इसमें से पहले सबसे अधिक साल्ट वाली 1.70 लाख एकड़ भूमि को सुधारा जाएगा।

भूमिगत जल निकास प्रणाली के तहत साल्ट (खारा) युक्त पानी को निकालकर ड्रेन में डाला जाएगा। जिससे तीन साल में साल्ट डेढ़ से तीन मीटर तक जमीन के अंदर चले जाते हैं और ऊपर के साल्ट भूमि से खत्म हो जाते हैं और जमीन दोबारा से उपजाऊ हो जाती है।    

इस विधि के अनुसार भूमि में लगभग एक मीटर नीचे 10-15 सेंटीमीटर व्यास के छिद्र युक्त लोहे या सीमेंट-कंक्रीट के पाइप दबाए जाते हैं। इन पाइपों को मुख्य पाइप लाइन से जोड़कर उस पानी को सैंप (होद)तक पहुंचाया जाता है। वहां से तीन हॉर्सपावर वाले सोलर पंप सेट से उस पानी को ड्रेन में छोड़ा जाता है।

जिससे भूमि का जल स्तर नीचे चला जाता है और साल्ट युक्त पानी बाहर निकाल दिया जाता है। बारिश का पानी जब जमीन में जाता है भूमि के जल में सुधरा हो जाता है। उसके बाद वह पानी कृषि के लिए दोबारा से प्रयोग के योग्य हो जाता है।

विभागीय जानकारी के अनुसार खारे पानी की सबसे अधिक समस्या रोहतक और झज्जर जिले में है।  दोनों जिलों में 50-50 हजार एकड़ भूमि सबसे अधिक सेम ग्रस्त है। भूमि संरक्षण विभाग ने सरकार से इस साल अकेले झज्जर जिले के लिए 450 करोड़ रुपये का बजट मांगा है, ताकि सबसे पहले झज्जर जिले के तीन गांवों की भूमि को सुधारा जा सके। झज्जर जिले के डीघल गांव की 3 हजार एकड़ , बिठला व बिसहान गांव की करीब 500 एकड़ भूमि का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। रोहतक जिले के विभिन्न गांवों की 5650 एकड़ भूमि को सुधारा जा चुका है।
होलेंड से मंगाई गई थी मशीन

प्रदेश सरकार की तरफ से अब तक इस योजना के तहत तीन मशीनें विदेश से मंगवाई गई हैं। इनमें से करनाल में 1996 में पहले मशीन होलेंड से मंगवाई गई थी जो कंडम हो चुकी है। उसके बाद 1999-2000 में दो मशीनें और मंगवाई गई थी। एक मशीन रोहतक जिले के लाखन माजरा व दूसरी मशीन सोनीपत के गढ़वाल गांव की कर्मशलाओं में हैं। ये मशीने गेहूं की कटाई के बाद मध्य मार्च, अप्रैल व मई में खेत खाली होने पर ही काम कर पाती हैं। विभाग ने और मशीनें खरीदने के लिए सरकार को प्रपोजल भेजा हुआ है ताकि यह काम तेजी से पूरा हो सके। 

इन जिलों के लिए बनाई कार्ययोजना

विभाग की तरफ से रोहतक, भिवानी, झज्जर, जींद, सोनीपत, चरखी दादरी, हिसार, फतेहाबाद सिरसा, पलवल व नूहं जिले शामिल हैं। इसके अलावा सोलर ट्यूबवेल विधि के तहत भी पानी की निकासी की जा सकती है। इस विधि से एक-एक एकड़ दूरी पर बोरिंग कर सोलर सिस्टम से चला कर पानी के स्तर को कम किया जा सकता है। 
प्रदेश के 11 जिलों में करीब साढ़े 9 लाख एकड़ भूमि सेमग्रस्त है। इसे कृषि योग्य बनाने के लिए सरकार से करीब 3900 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट सरकार को भेजे हैं। सरकार से जिस प्रकार बजट जारी होगा उसके अनुसार काम शुरू किया जाएगा। – ओपी गोदारा, भूमि संरक्षण अधिकारी, रोहतक।

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