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अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 19 May 2022 11:31 AM IST

सार

संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा ने बुधवार को जिला उपनिदेशकों और निजी व सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों को पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया है कि बच्चों की मौजूदगी के दौरान अगर कोई भी स्कूल बस या टैक्सी को चालक किसी अन्य वाहन से ओवर टेक करता हुआ पाया गया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

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हिमाचल प्रदेश में स्कूल बसों और टैक्सियों पर अन्य वाहनों को ओवरटेक करने पर रोक लगा दी गई है। विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी निजी और सरकारी स्कूल प्रिंसिपलों को इसके निर्देश जारी किए हैं। चलते समय बसों के दरवाजे बंद रखने और निर्धारित स्थानों पर ही वाहन रोकने की हिदायत दी गई है। बस चालक के पास भारी वाहन चलाने का न्यूनतम पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया है। बसों में आग बुझाने के यंत्र होने चाहिए। बसों और टैक्सियों में ओवरलोडिंग पर भी रोक लगाई गई है। नियमों का पालन नहीं करने वाले बस चालकों और स्कूल प्रबंधकों को कार्रवाई के प्रति भी चेताया है।संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा ने बुधवार को जिला उपनिदेशकों और निजी व सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों को पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया है कि बच्चों की मौजूदगी के दौरान अगर कोई भी स्कूल बस या टैक्सी को चालक किसी अन्य वाहन से ओवर टेक करता हुआ पाया गया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने से लेकर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। स्कूल बसों और टैक्सियों को अधिक स्पीड में भी नहीं चलाना होगा। स्कूल बसों के चलते समय दरवाजे बंद रहने चाहिए। बसों और टैक्सियों में स्कूल ड्यूटी आगे और पीछे लिखवाना भी अनिवार्य किया गया है।

शिक्षा निदेशालय ने विद्यार्थियों को बसों और टैक्सियों में बैठते और उतरते समय अनुशासन बनाए रखने के लिए जागरूक करने के स्कूलों प्रभारियों को निर्देश दिए हैं। पीटीए और एसएमसी बैठकों के दौरान सड़क सुरक्षा को लेकर भी जागरूक करने को कहा गया है। प्रदेश के सभी स्कूलों पर यह व्यवस्था वीरवार से लागू कर दी गई है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने कहा है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई होगी।

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में स्कूल बसों और टैक्सियों पर अन्य वाहनों को ओवरटेक करने पर रोक लगा दी गई है। विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी निजी और सरकारी स्कूल प्रिंसिपलों को इसके निर्देश जारी किए हैं। चलते समय बसों के दरवाजे बंद रखने और निर्धारित स्थानों पर ही वाहन रोकने की हिदायत दी गई है। बस चालक के पास भारी वाहन चलाने का न्यूनतम पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया है। बसों में आग बुझाने के यंत्र होने चाहिए। बसों और टैक्सियों में ओवरलोडिंग पर भी रोक लगाई गई है। नियमों का पालन नहीं करने वाले बस चालकों और स्कूल प्रबंधकों को कार्रवाई के प्रति भी चेताया है।

संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा ने बुधवार को जिला उपनिदेशकों और निजी व सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों को पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया है कि बच्चों की मौजूदगी के दौरान अगर कोई भी स्कूल बस या टैक्सी को चालक किसी अन्य वाहन से ओवर टेक करता हुआ पाया गया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने से लेकर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। स्कूल बसों और टैक्सियों को अधिक स्पीड में भी नहीं चलाना होगा। स्कूल बसों के चलते समय दरवाजे बंद रहने चाहिए। बसों और टैक्सियों में स्कूल ड्यूटी आगे और पीछे लिखवाना भी अनिवार्य किया गया है।

शिक्षा निदेशालय ने विद्यार्थियों को बसों और टैक्सियों में बैठते और उतरते समय अनुशासन बनाए रखने के लिए जागरूक करने के स्कूलों प्रभारियों को निर्देश दिए हैं। पीटीए और एसएमसी बैठकों के दौरान सड़क सुरक्षा को लेकर भी जागरूक करने को कहा गया है। प्रदेश के सभी स्कूलों पर यह व्यवस्था वीरवार से लागू कर दी गई है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने कहा है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई होगी।

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