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DNA with Sudhir Chaudhary: महंगाई के मामले में भारत की स्थिति अमेरिका, रशिया और ब्रिटेन जैसे देशों से काफी बेहतर है. रशिया में रिटेल महंगाई दर 20 साल बाद सबसे ज्यादा है. वहां महंगाई दर 17.8 प्रतिशत दर्ज की गई है. जबकि भारत में ये दर 7.79 प्रतिशत है. यानी भारत की तुलना में रशिया में महंगाई काफी ज्यादा है. अमेरिका में महंगाई दर 41 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है. अमेरिका में वर्ष 1981 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब वहां महंगाई दर मार्च महीने में 8.5 प्रतिशत दर्ज की गई. इसी तरह ब्रिटेन में 40 साल बाद महंगाई दर ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. ब्रिटेन में अप्रैल महीने में महंगाई दर 9 प्रतिशत दर्ज हुई है. इसके अलावा ब्राज़ील में महंगाई दर 12.13 प्रतिशत, पाकिस्तान में 13.4 प्रतिशत, Egypt में 13.1 प्रतिशत और Turkey में तो महंगाई दर 69 प्रतिशत हो गई है. और ऐसा वहां के इतिहास में पहली बार हुआ है. जर्मनी में भी महंगाई ने 32 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.

दूसरे देशों की तुलना में भारत बेहतर

यानी भारत में महंगाई जरूर बढ़ी है. लेकिन भारत की स्थिति दूसरे देशों की तुलना में काफी बेहतर है. हालांकि आपके मन में ये सवाल भी ज़रूर होगा कि महंगाई दुनिया के सभी 195 देशों को क्यों प्रभावित कर रही है? तो इसके तीन बड़े कारण हैं. पहला कारण है कोविड- आपको याद होगा कि कोविड के दौरान पूरी दुनिया में लॉकडाउन लगाया गया था. अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लग गया था. इन कड़ी पाबंदियों की वजह से हुआ ये कि जिन Supply Chains को विकसित होने में दशकों लगे थे, वो कुछ ही दिनों में टूट गईं.

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कोविड से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित

इस समय जो वैश्विक अर्थव्यवस्था है, उसमें ऐसे Products की गिनती ना के बराबर है, जो एक ही देश में बनाए जाते हैं. आम तौर पर हर प्रोडक्ट के निर्माण में कई देशों की भूमिका होती है. उदाहरण के लिए, आज आप जो मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हैं. वो एक देश में नहीं बनता. उसके पार्ट्स दूसरे देशों से आते हैं, उसे डिजायन किसी और देश में किया जाता है और जो फाइनल प्रोडक्ट है, वो किसी और देश में बनता है. लेकिन अब सोचिए जिन देशों में मोबाइल फोन के Parts बनाए जाते हैं, वो Parts अगर उन देशों तक ना पहुंचे, जहां फाइनल प्रोडक्ट बनाया जाता है तो क्या होगा. तो ऐसी स्थिति में मोबाइल फोन का उत्पादन रुक जाएगा और नए मोबाइल फोन बाजार में आ ही नहीं पाएंगे. कोविड ने ऐसा ही किया. कोविड ने ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित किया. जिससे मोबाइल फोन से लेकर गाड़ियों और दूसरे Products के उत्पादन पर गहरा असर पड़ा.

भारत में तेजी से बढ़ रही वाहनों की कीमत

जैसे, लॉकडाउन लगने के बाद चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने Semiconductor Chips का उत्पादन कम कर दिया. ये Chips गाड़ियां, मोबाइल फोन और दूसरे Electronic Gadgets बनाने में इस्तेमाल होती है. लेकिन लॉकडाउन के बाद जब इन Chips की मांग बढ़ी तो इसकी सप्लाई चेन पूरी तरह टूट चुकी थी. जिससे गाड़ियों और दूसरी चीजों के उत्पादन पर असर बढ़ा. जब इन Products की मांग बढ़ी तो इनके दाम भी अचानक से बढ़ गए. जनवरी 2021 से भारत में गाड़ियों की कीमतें पांच बार बढ़ चुकी हैं. इसी साल ये कीमतें दो बार बढ़ी हैं.

डिमांड से बढ़ रही कीमत

उदहारण के लिए, Mahindra की XUV 700 गाड़ी पहले 11 लाख 99 हजार रुपये की थी. लेकिन अब इसकी कीमत 13 लाख 18 हजार रुपये हो चुकी है. यानी इसकी कीमतों में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा Maruti कम्पनी की गाड़ी, Celerio की कीमत पांच प्रतिशत तक बढ़ गई हैं. पहले इसका बेस मॉडल चार लाख 99 हजार रुपये का था. अब इसकी कीमत पांच लाख 25 हजार रुपये हो चुकी है. ये स्थिति तब है, जब लोगों को नई गाड़ियों के लिए बुकिंग के बाद भी औसतन चार से छह महीने का इंतजार करना पड़ रहा है. इसके अलावा कुछ गाड़ियां ऐसी भी हैं, जिनका Waiting Time एक साल है. लेकिन इसके बावजूद लोगों पर इस महंगाई का कोई असर नहीं है. वो महंगाई के बावजूद इन गाड़ियों को खरीदना चाहते हैं. इसलिए यहां आपको ये बात समझनी है कि ये वो महंगाई है, जो लोग अपनी डिमांड से खुद बढ़ा रहे हैं. अगर वो ये तय करते हैं कि वो रुक कर बाद में गाड़ी खरीद लेंगे तो इससे गाड़ियों की डिमांड कम होगी और इसकी कीमतें भी कम हो जाएंगी.

सप्लाई चेन कितनी महत्वपूर्ण?

हालांकि सप्लाई चेन प्रभावित होना सभी देशों के लिए चिंता का विषय है. मान लीजिए आप एक किसान है. आप किसी सब्जी की खेती करना चाहते हैं. उस खेती के लिए आपको Fertilizers चाहिए और ये Fertilizers आपका देश, किसी और देश से आयात करता है. तो ये सप्लाई चेन उस देश से शुरू होगी. क्योंकि जब तक आपको Fertilizers नहीं मिलेंगे, तब तक आप खेती ही नहीं कर पाएंगे. तो पहली चेन में ये Fertilizers दूसरे देश से आपके देश में आएंगे. इसके बाद इन्हें Logistics कम्पनियों द्वारा अलग अलग राज्यों में भेजा जाता है. यानी दूसरी चेन आपका राज्य और वहां का प्रशासन है. तीसरी चेन यानी तीसरी कड़ी वो कम्पनियां हैं, जो ये Fertilizers आपको बेचती हैं. चौथी चेन वो किसान है, जो ये Fertilizers खरीद कर खेती शुरू करते हैं. इसके बाद वो किसान अपनी फसल को बाजार में बेचने जाते हैं. और बाजार में थोक विक्रेता इसे दुकानदारों को बेचते हैं और दुकानदारों से ये सब्जी आम लोगों को मिलती है. इससे आप समझ सकते हैं कि सप्लाई चेन कितनी महत्वपूर्ण होती है. पूरी दुनिया में कोविड की वजह से इस पर गहरा असर पड़ा है.

यूक्रेन और रशिया का युद्ध

महंगाई की एक बड़ी वजह ये भी है कि कोविड के दौरान लोगों ने अपने खर्च में कटौती कर ली थी. वो खर्च से ज्यादा बचत कर रहे थे. वर्ष 2020 में भारतीय उपभोक्ताओं ने अपना खर्च लगभग 11 प्रतिशत तक कम कर लिया था. लेकिन अब जब बाजार खुल गए हैं और ज्यादातर पाबंदियां हट गई हैं, तब लोगों ने अपना खर्च बढ़ा लिया है. वो अब नई गाड़ी भी खरीदना चाहते हैं और नया फोन भी खरीदना चाहते हैं. इस महंगाई का दूसरा कारण है यूक्रेन और रशिया का युद्ध- यानी पहले तो दो साल कोविड ने मारा और अब जब ऐसा लग रहा था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को कोविड से राहत मिल सकती है, तब युद्ध ने चिंता बढ़ा दी. इस युद्ध की वजह से दुनियाभर में अनाज का संकट खड़ा हो गया. क्योंकि रशिया और यूक्रेन दोनों ही दुनिया के 25 प्रतिशत अनाज की ज़रूरत को पूरा करते हैं. लेकिन युद्ध के बाद से इन देशों ने अनाज का निर्यात सीमित कर दिया है.

दुनिया में अनाज का संकट

रशिया पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा 18 प्रतिशत अनाज का निर्यात करता है. जबकि यूक्रेन इस सूची में पांचवें स्थान पर है, जो दुनियाभर में सात प्रतिशत अनाज का निर्यात करता है. और इसी वजह से इन देशों को यूरोप में Bread Basket भी कहा जाता है. अब क्योंकि ये दोनों देशों युद्ध लड़ रहे हैं, इस वजह से दुनिया में अनाज का संकट खड़ा हो गया है. यूरोप के देश चाहते हैं कि अब भारत सरकार अनाज के निर्यात पर लगाई गई रोक को हटा दे. हालांकि भारत सरकार ने फिलहाल ऐसा करने से मना कर दिया है. लेकिन इसके साथ ही भारत सरकार ने आज ही ये  ऐलान किया है कि वो अपने लोगों की Food Security के साथ पड़ोसी देशों की अनाज की जरूरत को पूरा करने के लिए तैयार है.

कई देशों में खेती करना मुश्किल

इसके अलावा रशिया और बेलारूस पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा Fertilizers का निर्यात करते हैं. लेकिन युद्ध की वजह से इस प्रक्रिया पर भी असर पड़ा है, जिससे कई देशों में खेती करना मुश्किल हो गया है. क्योंकि किसानों को Fertilizers मिल ही नहीं पा रहे हैं. भारत अपनी ज़रूरत का 33 प्रतिशत Fertilizers रशिया और बेलारूस से खरीदता है. और यही वजह है कि हमारे देश में इससे खेती प्रभावित हो रही है और खाद्य वस्तुएं महंगी हो रही हैं. इसके अलावा यूक्रेन और रशिया Cooking Oil के भी सबसे बड़े Exporter हैं. पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा 47 प्रतिशत Sunflower Oil यूक्रेन से और 23 प्रतिशत Sunflower Oil रशिया से आता है, लेकिन युद्ध ने इसके निर्यात को भी सीमित कर दिया है. जिससे Cooking Oil भारत समेत कई देशों में महंगा हो गया है.

कच्चे तेल और गैस की कीमतें भी बढ़ीं

रशिया पर कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से कच्चे तेल और गैस की कीमतें भी बढ़ी हैं, जिससे कई देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ गए हैं. अमेरिका के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा तेल का उत्पादन रशिया में होता है. यूरोप की 60 प्रतिशत गैस रशिया से ही जाती है. इसलिए रशिया पर प्रतिबंध लगने से कच्चे तेल और गैस की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें काफी बढ़ गई हैं और अस्थिर हो गई हैं. अब बड़ी बात ये है कि जब पेट्रोल डीजल महंगा होता है तो Transportation का खर्च बढ़ जाता है. Transportation महंगा होने से मूलभूत चीजें अपने आप महंगी हो जाती हैं. क्योंकि इन्हें एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाने में ज्यादा खर्च आता है. ये सारे कारण महंगाई पर असर डालते हैं. बड़ी बात ये है SBI ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि भारत में जो महंगाई बढ़ी है, उसमें 59 प्रतिशत कारणों के लिए यूक्रेन रशिया का युद्ध जिम्मेदार है.

भारत के कई राज्यों में बेमौसम बारिश

तीसरा बड़ा कारण है मौसम- पिछले साल भारत के कई राज्यों में बेमौसम बारिश हुई. इसके अलावा ब्राज़ील में कई वर्षों के बाद भीषण सूखा पड़ा. अमेरिका में एक के बाद एक दो बड़े तूफान आए और यूरोप के देशों में भी मौसम का पैटर्न काफ़ी बदल गया, जिससे किसानों की फसले प्रभावित हो गईं…उत्पादन कम हो गया और बाज़ार में पर्याप्त मात्रा में इन फसलों की सप्लाई नहीं हो पाई. हमारे देश में कहा जाता है कि अगर घर में बनाने के लिए कोई सब्ज़ी ना हो और सिर्फ आलू टमाटर प्याज़ भी हो..तो इससे दो वक्त की रोटी खाई जा सकती है. लेकिन इन तीन सबसे प्रमुख सब्जियों के महंगे हो जाने का असर महंगाई दर पर सबसे ज्यादा पड़ा है.

महंगाई और मौत सबसे ज्यादा धर्मनिरपेक्ष

एक जमाना था..जब खबरों में भी महंगाई की बात होती थी और इसे फिल्मों में भी जगह मिलती थी. लेकिन अब मंहागाई का मुद्दा खबरों के साथ साथ फिल्मों से भी गायब होता जा रहा है. अब महंगाई जैसे मुद्दों में कोई ग्लैमर नहीं बचा है. इस मुद्दे को अगर अखबारों में जगह मिलती भी है तो वहां भी आपको भारी भरकम आंकड़े दे दिए जाते हैं. मुद्दे की बात आपको कोई नहीं बताता. महंगाई और मौत सबसे ज्यादा धर्मनिरपेक्ष होते हैं. ये जाति-पाती और धर्म नहीं देखते, इनके लिए सब बराबर है. इसलिए हमने आपको महंगाई का पूरा गणित समझाने की कोशिश की. इसलिए अगली बार आपसे कोई ये पूछे कि दुनियाभर में इतनी महंगाई क्यों बढ़ रही है तो उसे आप हमारा ये विश्लेषण दिखा सकते हैं.

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