Jyotiraditya Scindia promise cheap air service on 120 new routes soon READ EXCLUSIVE INTERVIEW – India Hindi News – ज्योतिरादित्य सिंधिया का वादा

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केंद्र सरकार ने हवाई यात्रियों के लिए कोरोना प्रोटोकॉल से छूट दे दी है। नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ‘हिंदुस्तान’ के ब्यूरो चीफ मदन जैड़ा और विशेष संवाददाता सौरभ शुक्ल के साथ खास बातचीत में कहा है कि कोरोना के नियम खत्म होने से लोगों को अब यात्रा में ज्यादा सहूलियत होगी। वे अपनी इच्छा के अनुसार मास्क पहन या उतार सकेंगे। साथ ही उन्होंने महंगे किराए पर राज्यों में एटीएफ पर लगने वाले वैट की असमानता को खत्म करने की अपील की। उन्होंने ये भी कहा कि हवाई यात्रियों की समस्याओं की निगरानी वह खुद करते हैं। सभी मुश्किलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। पेश है उड्डयन एवं इस्पात क्षेत्र के विभिन्न मुद्दों को लेकर उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश -

सवाल : क्या कोरोना के प्रतिबंध हवाई यातायात से पूरी तरह खत्म हो गए हैं? या अभी भी कुछ बाकी हैं?

जवाब : कोविड प्रोटोकॉल खत्म हो गए हैं, लेकिन सतर्कता तो हमेशा ही रहनी चाहिए। मास्क की अनिवार्यता हमने खत्म कर दी है। अब लोग अपनी इच्छा के अनुसार मास्क पहन या हटा सकते हैं। अब एयर सुविधा फॉर्म भरने और वैक्सीन सर्टिफिकेट भी जरूरत नहीं होगी। इससे जाहिर है यात्रियों को सुविधा होगी।

सवाल : चीन में कोरोना के बढ़ते मामलों के आंकड़े आने शुरू हो गए हैं। इनको देखते हुए क्या कोई समीक्षा हुई है या फिर कोई भविष्य के लिए रणनीति?

जवाब : कोरोना के मामलों को देखना स्वास्थ्य मंत्रालय के दायरे में आता है, लेकिन मुझे विश्वास है कि देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आंकड़ों को देखते हुए इसकी क्षमता बेहद कम है। हालांकि, सतर्कता सभी को बरतनी चाहिए।

सवाल : उड़ान योजना की स्थिति क्या है। क्या इस योजना के तहत निकट भविष्य में कुछ नए मार्गों की पहचान की गई है?

जवाब : उड़ान 4.2 की तैयारी चल रही है। करीब 120 नए रूट शुरू कर रहे हैं, जिनमें से 18 प्रतिशत उत्तर पूर्व राज्यों में होंगे। इसके तहत कोशिश है कि प्राथमिक तौर पर टियर-1 और टियर-2 शहरों के बीच आवागमन को और बढ़ाया जाए। इसमें छोटे विमानों को भी प्राथमिकता दी है और हेलिकॉप्टर को भी बढ़ावा दिया जाएगा। हमारी कोशिश है कि अंतिम छोर तक हवाई सेवाओं की कनेक्टिविटी रहे।

सवाल : कोरोना के बाद हवाई रूट बढ़े हैं, लेकिन किराया भी कई रूट पर बढ़ा हुआ ही नजर आ रहा है। ये कैसे कम होगा?

जवाब : किराया तो मांग और आपूर्ति के हिसाब से बदलता रहता है। एविएशन में कुछ महीने ऐसे रहते हैं, जिनमें मांग ज्यादा रहती है तो पीक सीजन के दौरान किराया ज्यादा रहता है। वहीं, एयरलाइन की लागत में 50 फीसदी हिस्सा एटीएफ का होता है। इसके दामों का भी प्रभाव टिकट पर पड़ता है।

सवाल : सरकार आम आदमी को हवाई जहाज में सफर करने को प्राथमिकता से बढ़ावा दे रही है, लेकिन इतने महंगे एटीएफ के होते हुए ये सपना कैसे साकार होगा? एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने की बात कहां तक पहुंची?

जवाब : विमानन सेवाओं को लंबी अवधि के नजरिए से देखने की जरूरत है। जब मैं आया था तो 12 राज्यों में एटीएफ पर वैट 1-4 फीसदी के दायरे में था। 24 राज्य ऐसे थे, जहां ये 20-30 फीसदी था। अब हमारी राज्यों के साथ चर्चा के बाद अब 24 में से 16 राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने एटीएफ पर वैट घटाया है और 1-4 फीसदी में आ गए हैं। हालांकि दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, गोवा, असम, राजस्थान समेत 8 राज्यों में वैट अभी भी ज्यादा है। मैं इन राज्यों से वैट घटाने और ग्राहकों को सस्ता हवाई टिकट देने के रास्ते में सहायक बनने की अपील करता हूं। वैट घटने से भले ही सरकार को एटीएफ पर लाभ कम हो जाए, लेकिन राज्यों से एटीएफ की खरीद बढ़ जाएगी। श्रीनगर में एटीएफ घटने के बाद वहां एक हफ्ते के भीतर श्रीनगर में रीफ्यूलिंग में 360 फीसदी की बढ़त हुई। साथ ही विमानों की आवाजाही भी डेढ़ गुना बढ़ी। ऐसे में जो राज्य वैट घटा रहे हैं, उन्हें दूसरे फायदे भी हो रहे हैं। एटीएफ घटेगा तो टिकट भी सस्ते होने के आसार बनेंगे।

सवाल : भारत कोई सरकारी एयरलाइन लाने पर विचार कर रहा है क्या?

जवाब : सरकार अपनी कोई एयरलाइन शुरू नहीं करेगी। हालांकि, 20 साल बाद देश में नई एयरलाइंस शुरू हो रही हैं। इस क्षेत्र में पहले एक के बाद एक कंपनियां बंद हो रही थीं। अब हालात बदल रहे हैं। अकासा आ गई है और जल्द ही जेट एयरवेज भी नए तरह से सामने आएगी।

सवाल : अभी भी एयरलाइंस की तरफ से रिफंड को लेकर ग्राहकों की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। डीजीसीए की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 27 फीसदी के करीब ग्राहकों ने रिफंड से जुड़ी समस्याओं की शिकायतें की है। इस पर और ग्राहकों की बाकी शिकायतों के निपटारे के लिए जो कुछ भी किया जा रहा है, उसके नतीजे कैसे आ रहे हैं?

जवाब : ग्राहकों की शिकायतों को दूर करने के लिए मंत्रालय युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। सरकार ने शिकायतों के लंबित रहने की दरों को 90 फीसदी तक घटाया है। हमारे मंत्रालय में शिकायतों के निपटारे की बकायदा सेल है, जिसकी मैं खुद निगरानी करता हूं। यहां रिफंड या फिर दूसरी समस्याओं का निराकरण जल्द से जल्द किया जा रहा है। इसकी दक्षता पिछले एक साल में काफी अच्छी रही है।

सवाल : आजकल हवाई दुर्घटनाओं के मामले ज्यादा प्रकाश में आ रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए सरकार और डीजीसीए की तरफ से ऐसा क्या किया जा रहा है कि यात्री अपने आप को सुरक्षित महसूस कर पाएं?

जवाब : यात्रियों को सुरक्षित रखने की दिशा में सरकार के प्रयास लगातार जारी रहते हैं। पिछले एक साल में हमारा सालाना सर्विलांस प्लान 50 फीसदी और बढ़ा दिया गया है। इसके बाद इंजीनियरिंग से जुड़े चेक और दूसरे पैमानों पर निगरानी बढ़ाई है। हमारी पूरी कोशिश है कि सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

सवाल : स्टील के ऊपर निर्यात शुक्ल सरकार को हटाना पड़ा। क्या निर्यात घटना ही इसके पीछे वजह है? ये कदम सरकार की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा हैं या फिर आगे दोबारा ड्यूटी लग जाएगी?

जवाब : जो ड्यूटी लगाई गई थी, उसके पीछे वजह थी कि स्टील के दाम दुनियाभर में काफी बढ़ गए थे। हर चीज में स्टील का इस्तेमाल होता है। इसीलिए ड्यूटी लगाई गई। फिर लंबे मंथन और घरेलू के साथ साथ वैश्विक मोर्चे को देखते हुए हमने स्टील और उससे जुड़े उत्पादों को हटाया और कई जगह घटाया है। इसके बाद हमारी स्टील कंपनियां वैश्विक स्तर पर अपना कारोबार ज्यादा बढ़ा सकती हैं।

सवाल : कोयले की उपलब्धता देश में बढ़ाने को लेकर सरकार क्या कर रही है। स्टील के लिए भी बेहद जरूरी होता है? ऐसे में अलग-अलग मंत्रालयों के स्तर पर कैसी रणनीति बनाई जा रही है?

जवाब : कोकिंग कोल हमारा अहम कच्चा माल है। इसके लिए हमारी कोशिश है कि अलग-अलग जगहों से इसकी सोर्सिंग की जाए। कोल माइन का भी ऑक्शन करने की प्रक्रिया चल रही है।

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