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यूपीएससी की परीक्षा कठिन परीक्षाओं में से एक होती है, लेकिन कुछ ऐसे मेहनती लोग होते हैं जो इस परीक्षा का पास करने में कामयाब रहते हैं और IAS अधिकारी बन जाते हैं। आज हम बात कर रहे हैं  यूपीएससी 2021 में 97 रैंक हासिल करने वाले महाराष्ट्र के शुभम भाईसरे (Shubham Bhaisare) के बारे में। आइए जानते हैं उन्होंने इस परीक्षा की तैयारी कैसे की।

महाराष्ट्र के शुभम भाईसरे IAS बनने से पहले IES, IFS और IRTS जैसी अन्य परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की है, लेकिन उनका सपना शुरू से IAS बनने का था। साल 2021 में शुभम ने UPSC CSE परिणाम आने पर IAS अधिकारी बनने का अपना ये सपना पूरा कर लिया।

महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले की अरमोरी तहसील में जन्मे शुभम ने अपनी स्कूली शिक्षा कई स्कूलों से की, क्योंकि उनके पिता अशोक भाईसरे एक जिला न्यायाधीश थे और उनके तबादले के कारण शुभम के स्कूल बदलते गए। हालांकि, शुभम अपने आप को सौभाग्यशाली महसूस करता हैं कि उन्हें इतने सारे अद्भुत स्कूलों में पढ़ने और एक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिला, जो कि अन्य छात्रों के लिए इतनी आसानी से उपलब्ध नहीं है।

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अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, शुभम ने 2016 में मुंबई में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसी समय उन्होंने भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) की तैयारी करने का फैसला किया।

शुभम ने एक वेबसाइट्स को इंटरव्यू को देते हुए कहा, “मैंने साल 2017 में परीक्षा दी और इसे पास कर लिया और 2018 बैच का IES अधिकारी बन गया। फिर उसके बाद साल 2019 में UPSC CSE भी दिया और इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस (IRTS) के लिए सिलेक्शन हो गया, लेकिन IAS अधिकारी बनना मेरा सपना था, इसलिए मैंने फुल टाइम नौकरी पर काम करते हुए परीक्षा देना जारी रखने का फैसला किया”

 

इस पल ने बदल दी शुभम की जिंदगी

शुभम को जीवन में एक ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा जिसने आईएएस अधिकारी बनने का इरादा पक्का कर दिया। एक जज का बेटा होने के कारण शुभम अक्सर ऐसे लोगों से मिलते थे जो उनके पिता से मिलना और बात करना चाहते थे।

लेकिन एक दिन एक 75 साल से ज्यादा उम्र की बूढ़ी औरत ने शुभम की जिंदगी को बदल डाला।  वह उनके पिता की तलाश में उनके घर आई। बूढ़ी औरत के हाथ में  सब्जियों का एक बैग था जो शुभम के पिता को उपहार में देना चाहती थी। इसे स्वीकार करने से इनकार करते हुए और उसे जाने के लिए कहने पर, शुभम ने उसके साथ थोड़ी बातचीत की और  बूढ़ी औरत  की परेशानी सुनी।

“वह एक विधवा थी जिसका बेटा दूर था। इसलिए, उसके पास उसका समर्थन करने या उसकी मदद करने वाला कोई नहीं था। इसके अलावा, उसके रिश्तेदार उसकी संपत्ति और खेत पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे, और वह गहरे विवाद में फंस गई थी। उसकी हालत देखकर, शुभम का दिल सहानुभूति से भर गया और उन्हें एहसास हुआ कि मैं उसके जैसे और लोगों की मदद करने का एकमात्र तरीका IAS अधिकारी बनना है, जो एक व्यक्ति को किसी के जीवन में एक स्पष्ट बदलाव करने का मौका देता है, “

 

 

ये थी शुभम के लिए सबसे बड़ी चुनौती

शुभम के लिए  सबसे बड़ी चुनौती थी अपनी नौकरी और यूपीएससी की तैयारी दोनों को एक साथ संभालना। वह काम से आने-जाने के रास्ते में अखबार पढ़ते थे। घर पहुंचने के लगभग तुरंत बाद ही वह पढ़ाई करते थे।

उन्होंने उन सभी ऑफिस लीव को कैलकुलेट किया जो वे जमा कर सकते थे और उनका पढ़ाई के लिए उपयोग कर सकते थे। वह 6-8 महीने में केवल एक बार अपने माता-पिता से मिलने अपने घर जा पाते थे। तैयारी के दौरान वह सोशल मीडिया से भी पूरी तरह से दूर रहे और फोन से हर एक उस ऐप को अनइंस्टॉल कर दिया जो उसे अपने लक्ष्य से विचलित कर सकता था।

पांच बार यूपीएससी की परीक्षा की पास

शुभम ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा छह बार दी और पांच बार पास की। वह सिर्फ एक अंक से एक प्रयास में विफल रहे। साल 2019 में IRTS प्राप्त करने के बाद, उन्होंने 2020 में फिर से परीक्षा दी और AIR-727 हासिल किया।

उसी वर्ष, उन्होंने इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) परीक्षा दी और AIR-63 हासिल किया। उसी में उन्हें तेलंगाना कैडर मिला। वह आखिरकार AIR-97 हासिल करके UPSC CSE 2021 में IAS अधिकारी बनने के अपने सपने को हासिल करने में सफल रहे।

शुभम विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र में अपनी सेवाओं का योगदान देना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि प्रत्येक छात्र को उनकी सामाजिक स्थिति, जाति, पंथ या लिंग के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।

शुभम सभी उम्मीदवारों को अपने संदेश में कहना चाहते हैं कि यूपीएससी का कोई शॉर्टकट नहीं है और उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वास्तव में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। “अपनी तैयारी के लिए समर्पित रहें और ईमानदारी से अध्ययन करें, और दिन के अंत में, मीठी जीत आपके पास होगी।”

उन्होंने कहा, अगर चीजें उस तरह से नहीं होती हैं जिस तरह से वे उनसे उम्मीद करते हैं। उनका कहना है कि यात्रा थोड़ी लंबी हो सकती है, लेकिन लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकाना चाहिए।

 

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