Advertisement

Advertisement

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Thu, 19 May 2022 12:46 PM IST

सार

कोरोना की दूसरी लहर की रोकथाम के लिए पिछले साल अप्रैल में कुंभ मेला के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने निजी फर्मों को कोविड एंटीजन जांच का अनुबंध किया था, लेकिन मेले के दौरान एक लाख से अधिक सैंपलों की फर्जी जांच की गई।

ख़बर सुनें

कुंभ मेला 2021 के दौरान कोविड जांच फर्जीवाड़े में स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी अधिकारी-कर्मचारियों से दोबारा से बयान लिए हैं। बुधवार को निलंबित अधिकारियों समेत पांच ने कोविड जांच को लेकर विभाग के कुछ बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा है। पिछले साल अप्रैल में कुंभ मेला के दौरान कोरोना की दूसरी लहर की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निजी फर्मों को कोविड एंटीजन जांच का अनुबंध किया था, लेकिन मेले के दौरान एक लाख से अधिक सैंपलों की फर्जी जांच की गई। मामले में जिलाधिकारी हरिद्वार की जांच रिपोर्ट पर शासन ने तत्कालीन मेला स्वास्थ्य अधिकारी अर्जुन सिंह सेंगर और प्रभारी अधिकारी एनके त्यागी को निलंबित किया था।

ये भी पढ़ें…Ayurveda University: भ्रष्टाचार और भर्ती में गड़बड़ी की होगी विजिलेंस जांच, पूर्व मंत्री हरक सिंह की बढ़ सकती है मुश्किल

इसके साथ अन्य कर्मचारियों पर विभाग ने कार्रवाई की थी। शासन ने स्वास्थ्य निदेशक डॉ.भारती राणा को जांच अधिकारी नामित किया था। कोविड जांच फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट में कुछ बिंदुओं पर स्पष्ट न होने के कारण आरोपियों से दोबारा बयान लिए गए हैं।

विस्तार

कुंभ मेला 2021 के दौरान कोविड जांच फर्जीवाड़े में स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी अधिकारी-कर्मचारियों से दोबारा से बयान लिए हैं। बुधवार को निलंबित अधिकारियों समेत पांच ने कोविड जांच को लेकर विभाग के कुछ बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा है। 

पिछले साल अप्रैल में कुंभ मेला के दौरान कोरोना की दूसरी लहर की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निजी फर्मों को कोविड एंटीजन जांच का अनुबंध किया था, लेकिन मेले के दौरान एक लाख से अधिक सैंपलों की फर्जी जांच की गई। मामले में जिलाधिकारी हरिद्वार की जांच रिपोर्ट पर शासन ने तत्कालीन मेला स्वास्थ्य अधिकारी अर्जुन सिंह सेंगर और प्रभारी अधिकारी एनके त्यागी को निलंबित किया था।

ये भी पढ़ें…Ayurveda University: भ्रष्टाचार और भर्ती में गड़बड़ी की होगी विजिलेंस जांच, पूर्व मंत्री हरक सिंह की बढ़ सकती है मुश्किल

इसके साथ अन्य कर्मचारियों पर विभाग ने कार्रवाई की थी। शासन ने स्वास्थ्य निदेशक डॉ.भारती राणा को जांच अधिकारी नामित किया था। कोविड जांच फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट में कुछ बिंदुओं पर स्पष्ट न होने के कारण आरोपियों से दोबारा बयान लिए गए हैं।

Source link

Advertisement

Leave a Reply