MBBS: Supreme Court asked government how many ukraine medical students accommodated in other countries

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से यूक्रेन से लौटे उन भारतीय मेडिकल छात्रों का विवरण देने को कहा, जिन्होंने इसके शैक्षणिक गतिशीलता कार्यक्रम ( एकेडमिक मोबिलिटी प्रोग्राम ) का लाभ उठाया है। शैक्षणिक गतिशीलता कार्यक्रम के तहत, यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्र अन्य देशों के विश्वविद्यालयों या कॉलेजों में अपना पाठ्यक्रम पूरा कर सकते हैं। केंद्र ने कहा कि वह यूक्रेन के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने वाले और वहां युद्ध के कारण वापस लौटे मेडिकल छात्रों को भारतीय चिकित्सा संस्थानों या विश्वविद्यालयों में समायोजित नहीं कर सकता, क्योंकि इससे यहां पूरी चिकित्सा शिक्षा प्रणाली बाधित होगी।

न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को एक हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा कि किसी तीसरे देश में समायोजित किए गए मेडिकल छात्रों की संख्या कितनी है और यह योजना कैसे आगे बढ़ रही है। भाटी ने कहा कि केंद्र ने पहले अपना हलफनामा दायर किया था और कहा था कि विदेश मंत्रालय की सहायता से, राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) ने 6 सितंबर को एक नोटिस जारी किया था, जिसके तहत शैक्षणिक गतिशीलता कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसके तहत अन्य देशों में शेष पाठ्यक्रम (यूक्रेन के मूल विश्वविद्यालय व संस्थान की मंजूरी के साथ) पूरा किए जाने को एनएमसी स्वीकार करेगी।

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उच्चतम न्यायालय मेडिकल छात्रों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। ये छात्र मुख्य रूप से अपने सेमेस्टर में भारतीय मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं।

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