मेरठ, 21 अक्टूबर 2026: शहर में बुधवार को निकाली गई एक जागरूकता रैली आम लोगों और मरीजों के लिए मुसीबत बन गई। रैली के कारण कचहरी और आसपास के प्रमुख मार्गों पर करीब डेढ़ घंटे तक भीषण जाम लगा रहा। हालात इतने खराब हो गए कि मरीजों को लेकर जा रही और मरीजों को लेने निकलीं सात एंबुलेंस जाम में फंस गईं।
जाम का दायरा
पुलिस लाइन रोड से लेकर नेहरू रोड, वेस्टर्न कचहरी रोड, मेघदूत चौराहा, अंबेडकर चौराहा और सहकारी बैंक चौराहे तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। फूलबाग कॉलोनी चौराहे से लेकर इवज चौराहा और बच्चा पार्क तक यातायात प्रभावित रहा। मेघदूत चौराहे से इवज चौराहे तक भीषण जाम में लगभग 500 मीटर के अंदर 6 से 7 एंबुलेंस फंसी दिखाई दीं।
एंबुलेंस फंसने से बढ़ी मरीजों की परेशानी
जाम का सबसे गंभीर पहलू एंबुलेंस का फंसना रहा। इनमें कुछ एंबुलेंस मरीजों को लेकर जा रही थीं, जबकि कुछ को कॉल मिलने के बाद मरीजों को लेने पहुंचना था। सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारों के कारण एंबुलेंस को रास्ता मिलने में भारी परेशानी हुई। लोगों ने सवाल उठाया कि जब शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ रहा था, तब एंबुलेंस के लिए रास्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दी।
ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति
हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े जाम के दौरान प्रमुख चौराहों पर इक्का-दुक्का ट्रैफिक पुलिसकर्मी ही नजर आए। जब जाम की सूचना पर अफसरों के फोन घनघनाने लगे, तब ट्रैफिक पुलिस सक्रिय हुई और टीमों को मौके पर भेजा गया। ट्रैफिक प्रभारी संतोष कुमार सिंह टीम के साथ मेघदूत चौराहे पर पहुंचे और यातायात सुचारु कराने का प्रयास किया। रैली निकलने के बाद भी जाम से राहत मिलने में समय लगा और लोगों को करीब एक घंटे तक और परेशानी का सामना करना पड़ा।
लोगों के सवाल
जाम में फंसे लोगों ने यातायात प्रबंधन पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इस तरह की रैलियों का रूट और समय पहले से निर्धारित होता है। ऐसे में संबंधित मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने की आशंका भी पहले से रहती है। इसके बावजूद प्रमुख चौराहों पर पर्याप्त ट्रैफिक पुलिसकर्मी क्यों नहीं तैनात थे? क्या रैली के लिए यातायात डायवर्जन की व्यवस्था बनाई गई थी? यदि प्लान तैयार था तो उसे जमीन पर लागू क्यों नहीं किया गया?
लोगों का साफ सवाल था कि जागरूकता फैलाने के लिए निकाली गई रैली के कारण आम जनता और मरीजों को परेशानी उठानी पड़े, तो यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी कौन लेगा? रॉन्ग साइड वाहन भी व्यवस्था बिगाड़ रहे थे, लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था।
यह घटना मेरठ में ट्रैफिक प्रबंधन और रैली व्यवस्था के समन्वय पर सवाल खड़े करती है।





