NIOS 33rd Foundation Day celebration know about Aarambhika course

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राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) द्वारा माननीय अध्यक्ष महोदया प्रो. सरोज शर्मा जी के कुशल नेतृत्व में दिनांक 23 नवंबर 2022 को 33वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से माननीय राज्य शिक्षा मंत्री, डॉ. सुभाष सरकार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

इस समारोह में शिक्षा मंत्रालय के उच्चाधिकारीगण, एनआईओएस अध्यक्ष सहित सभी विभागाध्यक्ष तथा सभी कार्मिक, विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं के अध्यक्ष शामिल हुए। इस विशेष अवसर पर एनआईओएस के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एन. के. अंबष्ट जी और केन्द्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा की उपकुलपति माननीया प्रो. सुषमा यादव जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

एनआईओएस अध्यक्ष प्रो. सरोज शर्मा ने सभी अतिथियों तथा एनआईओएस के सभी कार्मिकों का स्वागत किया। अपने वक्तव्य में प्रो. सरोज शर्मा जी द्वारा एनआईओएस के स्थापना के 33वर्ष की यात्रा को रेखांकित करते हुए एनआईओएस की विशेष उपलब्धियों को बताया गया।

एनआईओएस शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत दो राष्ट्रीय शिक्षा बोर्डों में से एक है जो माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक स्तर तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा (ODL) के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा प्रदान करता है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में एनआईओएस की भूमिका, शिक्षा नीति के सफल कार्यान्वयन हेतु एनआईओएस द्वारा किए जा रहे प्रयास, वर्चुअल ओपन स्कूल, डिजिटल लाइब्रेरी (DEEP), नेपिया प्रोजेक्ट, अग्निवीर परियोजना के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन, मुक्त कौशल केंद्रों की स्थापना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के विषयों के बारे में विस्तार से बताया गया। अध्यक्ष महोदया द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि एनआईओएस द्वारा ‘इंडियन डाइसपोरा’ के लिए ‘आरंभिका’ नामक पाठ्यक्रम का निर्माण किया जा रहा है।

 

इस अवसर पर एनआईओएस की 33 वर्षों की शैक्षिक प्रयासों की यात्रा पर आधारित एक वृत्तचित्र प्रस्तुत किया गया। इस वृत्तचित्र में ‘ऑल इंग्लैंड ओपन  बैडमिंटन चैम्पियनशिप विजेता खिलाड़ी पुलेला गोपीचन्द ने बताया कि उनकी  बैडमिंटन अकादमी में अधिकतर खिलाड़ी एनआईओएसस से ही शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर माननीय राज्य शिक्षा मंत्री जी द्वारा एनआईओएस की छमाही पत्रिका ‘प्रज्ञान’ का विमोचन किया गया।

इस अवसर पर एनआईओएस के पूर्व शिक्षार्थी सुश्री निरंजना तथा श्री विनोद कुमार चौधरी को भी सम्मानित किया गया। श्री विनोद कुमार ने कहा कि एनआईओएस में शिक्षा प्राप्त करने के कारण ही वे टाइपिंग के क्षेत्र में 10 बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाने का श्रेय प्राप्त कर पाए हैं। एनआईओएस की गौरवान्वित शिक्षार्थी सुश्री निरंजना जी एक सफल वेंट्रिलोक्विस्ट हैं।   

एनआईओएस के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एन. के. अंबष्ट जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि तकनीक के युग में नवाचारों का प्रयोग करते हुए हमें प्रवासी भारतीयों (इंडियन डिस्पोरा) के लिए ‘स्टैंड अलोन’ विषयों का निर्माण करने की आवश्यकता है। इससे हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे।

माननीया प्रो. सुषमा यादव जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि शिक्षा नीति के आलोक में एनआईओएस की भूमिका बढ़ गई है। एनआईओएस में इतनी क्षमता है कि यह संस्थान आने वाले वर्षों में शिक्षा नीति के महती लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेगा।  

मुख्य अतिथि माननीय राज्य शिक्षा मंत्री ने अपने उद्बोधन में एनआईओएस के विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं की अत्यंत प्रशंसा की और कहा कि एनआईओएस पूरे विश्व में ज्ञान का द्वीप प्रज्ज्वलित कर रहा है। आजादी का अमृत महोत्सव के विषय में बताते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि आज के छोटे बच्चे आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर लगभग 30-40 वर्ष के युवा होंगे जिनके कंधों पर राष्ट्र निर्माण का कार्य रहेगा। आगे उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने एनआईओएस को अनेक दायित्व सौंपे हैं जैसे- समावेशी शिक्षा संसाधनों का विकास करना, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का विस्तार करना, आवश्यकतानुसार सभी पाठ्यक्रमों को अधिक भाषाओं में अनुवाद करना, भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित पाठ्यक्रमों का निर्माण और प्रमुख विदेशी भाषाओं में अनुवाद कर भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार करना, दीक्षा पर एनआईओएस की अध्ययन सामग्री को ले जाना इत्यादि। साथ ही उन्होंने एनआईओएस के ‘बेसिक साक्षरता मूल्यांकन’ के अंतर्गत दस करोड़ वयस्कों को नामांकित किया जाना, सेवाकालीन शिक्षकों को प्रशिक्षण, सेवाकालीन शिक्षकों के लिए 100 दिनों का विशेष प्रशिक्षण, जेंडर ग्रीन परियोजना तथा योग में प्रशिक्षण आदि कार्यक्रमों की प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि एनआईओएस में एक भाषा विषय के रूप में भारतीय सांकेतिक भाषा की पहल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर सहराई गयी है। भारतीय ज्ञान परंपरा को एक स्‍ट्रीम के रूप में आरंभ करना एक महत्‍वपूर्ण कदम है।

एनआईओएस द्वारा ‘दीप’ नामक ई-लाईब्रेरी के शुभारंभ को उन्होंने एक बड़ा कदम बताया। अंत में उन्होंने कहा कि यह संस्थान निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगा और शिक्षा की ज्योति जलाता रहेगा। इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक नृत्यों और देशभक्ति गीतों की सुंदर प्रस्तुती दी गई। सचिव, एनआईओएस श्री पी. के. मोहंती जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

 

 

 

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