नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि कैबिनेट ने कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के Ballari-गुंटकल रेलवे सेक्शन पर तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी है।
यह प्रोजेक्ट कुल ₹1,264 करोड़ की लागत से बनेगा। इससे भारतीय रेलवे के नेटवर्क में लगभग 46 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी।
क्या फायदे होंगे?
- पैसेंजर ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होगी
- महत्वपूर्ण वस्तुओं (जैसे मिनरल्स, सामान) का कुशल आवागमन संभव होगा
- भीड़भाड़ कम होगी
- सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी
- हर साल लगभग ₹149 करोड़ की लॉजिस्टिक्स लागत की बचत
- अतिरिक्त 16 मिलियन टन तक फ्रेट ट्रैफिक हैंडल हो सकेगा
- करीब 99 गांवों और 7 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह फैसला कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करेगा। नए आर्थिक अवसर भी पैदा होंगे।”
प्रोजेक्ट 2028-29 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर क्षमता काफी बढ़ाएगा।
बल्लारी-गुंटकल परियोजना का विस्तृत विवरण
परियोजना का नाम
बल्लारी-गुंटकल सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेल लाइन (Multi-Tracking Project)
मुख्य तथ्य
- मंजूरी: 24 जुलाई 2026 को केंद्रीय आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंजूरी दी।
- कुल लागत: लगभग ₹1,264 करोड़
- लंबाई: लगभग 46 किलोमीटर (भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में इतनी बढ़ोतरी)
- क्षेत्र: कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के 3 जिले
- पूरा होने का लक्ष्य: 2028-29 तक
- योजना: PM-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अंतर्गत
परियोजना का उद्देश्य
यह सेक्शन कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच एक महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर पर स्थित है। यहां पहले से दो लाइनें हैं, जिन पर ट्रैफिक बहुत ज्यादा है। तीसरी और चौथी लाइन बनाने से:
- पैसेंजर और फ्रेट दोनों ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी
- भीड़भाड़ (congestion) कम होगी
- माल ढुलाई और यात्री आवाजाही तेज व सुचारु होगी
प्रमुख लाभ
| लाभ | विवरण |
|---|---|
| अतिरिक्त फ्रेट क्षमता | प्रति वर्ष लगभग 16.22 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई |
| लॉजिस्टिक्स बचत | हर साल लगभग ₹149 करोड़ की बचत |
| जनसंख्या लाभ | लगभग 99 गांवों और 7 लाख लोगों को सीधा कनेक्टिविटी लाभ |
| पर्यावरण | सड़क परिवहन की तुलना में रेल से 89% कम CO₂ उत्सर्जन (लगभग 27 लाख पेड़ लगाने के बराबर) |
| रोजगार | लगभग 31 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजन |
| पर्यटन | सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों तक बेहतर पहुंच |
तकनीकी विवरण
- वेदवती नदी पर एक बड़ा मेगा ब्रिज बनाया जाएगा
- कुल 7 मेजर ब्रिज और 52 माइनर ब्रिज
- लगभग 80% भूमि पहले से उपलब्ध है, बाकी 20% अधिग्रहण करना होगा
- परियोजना की अवधि लगभग 3 वर्ष
व्यापक महत्व
यह परियोजना उत्तर कर्नाटक के आर्थिक कॉरिडोर का हिस्सा है। इससे पहले बल्लारी-होसपेट सेक्शन पर भी तीसरी-चौथी लाइन मंजूर हो चुकी है। होसपेट से हुबली तक की लाइन का DPR तैयार हो रहा है। पूरा होने पर गुंटकल से हुबली तक एक मजबूत रेल कॉरिडोर तैयार हो जाएगा, जो माल और यात्री दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होगा।
संक्षेप में: यह परियोजना दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर क्षमता बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और क्षेत्रीय विकास को तेज करने वाली एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पहल है।
बल्लारी-होसपेट सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेल लाइन (3rd & 4th Line Project)
मुख्य तथ्य
- मंजूरी: 14 फरवरी 2026 को केंद्रीय कैबिनेट (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में) ने मंजूरी दी। (यह तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं का हिस्सा था।)
- कुल लागत: ₹2,372 करोड़
- रूट लंबाई: 65 किलोमीटर
- कुल ट्रैक लंबाई: लगभग 149 किलोमीटर (लूप्स और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर सहित)
- राज्य: कर्नाटक (बल्लारी और विजयनगर जिले)
- पूरा होने का लक्ष्य: 4 वर्ष (लगभग 2030 तक)
परियोजना का उद्देश्य
यह सेक्शन दक्षिण भारत के व्यस्त फ्रेट और पैसेंजर कॉरिडोर (Vasco da Gama–Vijayawada Highly Utilised Network) का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आयरन ओर, स्टील प्लांट्स और औद्योगिक गतिविधियां बहुत ज्यादा हैं। तीसरी और चौथी लाइन बनाने से:
- ट्रेनों की क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी
- माल ढुलाई (फ्रेट) और यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी
- भीड़भाड़ कम होगी
प्रमुख लाभ
- औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा: आयरन ओर माइनिंग, स्टील हब्स और पावर प्लांट्स वाले क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी
- पर्यटन: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हम्पी, तुंगभद्रा डैम और अन्य पर्यटन स्थलों तक आसान पहुंच
- पर्यावरण: कार्बन उत्सर्जन में कमी (रिपोर्ट्स के अनुसार सालाना काफी CO₂ और डीजल की बचत)
- रोजगार और विकास: स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती
तकनीकी विवरण
- मेजर ब्रिज: लगभग 29–34 मेजर ब्रिज
- माइनर ब्रिज: 200 से ज्यादा
- स्टेशन: 19 स्टेशनों से जुड़ा
- भूमि अधिग्रहण अपेक्षाकृत कम है, इसलिए प्रोजेक्ट अपेक्षाकृत तेज गति से आगे बढ़ सकता है
यह परियोजना उत्तर कर्नाटक के औद्योगिक और खनिज समृद्ध क्षेत्र को मजबूत रेल नेटवर्क से जोड़ती है। हाल ही में (जुलाई 2026) मंजूर बल्लारी-गुंटकल तीसरी-चौथी लाइन के साथ मिलकर यह पूरा कॉरिडोर (गुंटकल–बल्लारी–होसपेट) और मजबूत हो जाएगा। आगे होसपेट-हुबली लाइन का भी DPR तैयार हो रहा है।
संक्षेप में: बल्लारी-होसपेट परियोजना कर्नाटक के औद्योगिक और पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जो फ्रेट और पैसेंजर दोनों सेवाओं को काफी बेहतर बनाएगी।





