पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुनियादी अधिकारों, आटे की भारी किल्लत और अत्यधिक बिजली बिलों के खिलाफ चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने बेरहमी से कुचल दिया है।
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की अंधाधुंध गोलीबारी में 30 से अधिक आम नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और मीरपुर समेत PoK के कई प्रमुख शहरों में हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं।
घटना का विवरण:
- PoK की जनता पिछले कई महीनों से ‘अवामी एक्शन कमेटी’ के नेतृत्व में सस्ता राशन, सस्ती बिजली और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन कर रही थी।
- शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी रेंजर्स और सेना ने पहले आंसू गैस के गोले दागे, लाठीचार्ज किया और फिर ऑटोमैटिक हथियारों से सीधी फायरिंग शुरू कर दी।
- रावलकोट में एक शहीद प्रदर्शनकारी के अंतिम संस्कार के दौरान भी हिंसा भड़क गई, जिसके बाद मौत का आंकड़ा और बढ़ गया।
- अस्पतालों में घायलों की भीड़ उमड़ पड़ी है। दवाओं और खून की भारी कमी है।
- पाकिस्तानी प्रशासन ने पूरे PoK में इंटरनेट, मोबाइल और ब्रॉडबैंड सेवाएं बंद कर दी हैं।
- कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है ताकि हिंसा की खबरें बाहर न फैल सकें।
- PoK के लोग अब ‘आजादी’ के नारे लगा रहे हैं और पाकिस्तानी फौज को वापस भेजने की मांग कर रहे हैं।
क्यों भड़का आंदोलन?
PoK की जनता पाकिस्तान पर आरोप लगा रही है कि वह उनके प्राकृतिक संसाधनों (खासकर पनबिजली) का शोषण कर रही है, लेकिन बदले में उन्हें भुखमरी और कंगाली दे रही है। भारी टैक्स, महंगाई और संसाधनों की लूट के खिलाफ जनता का गुस्सा फूट पड़ा।
भारत का बयान: भारत ने पाकिस्तान की पुलिस ब्रूटैलिटी की निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK में मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह बनाने की मांग की है।





