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DNA with Sudhir Chaudhary: आइए आपको बताते हैं कि हमारे देश में महंगाई इतनी बढ़ क्यों रही है? साथ ही आपको ये भी जानना चाहिए कि दुनिया के बड़े बड़े देशों में भारत से भी कहीं ज्यादा महंगाई बढ़ रही है. हमारे देश में महंगाई पर अब सिर्फ राजनीति होती है और नेता दिन-रात आपको महंगाई के नाम पर गुस्सा दिलाते रहते हैं. आपमें से ज्यादातर लोगों को ये बात पता ही नहीं होगी कि महंगाई असल में बढ़ती क्यों है और खासतौर पर पिछले तीन साल में भारत ही नहीं पूरी दुनिया में जबरदस्त महंगाई बढ़ी है. तो ऐसी क्या वजह हैं कि अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों की सरकारें भी इस महंगाई के सामने फेल हो गईं?

स्टॉक मार्केट में बड़ा विस्फोट

लेकिन सबसे पहले आपको ये भी जानना चाहिए, जब महंगाई बढ़ती है तो Stock Market में कितना बड़ा विस्फोट होता है. दुनिया के लगभग सभी बड़े Stock Market में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है. अमेरिका का Stock Market, NASDAQ दो साल बाद 4.7 प्रतिशत गिर गया है. ब्रिटेन का Stock Market, Financial Times Stock Exchange 2.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ बन्द हुआ है. भारत के Sensex में 2.6 प्रतिशत की गिरावट हुई है और जर्मनी के Stock Market में 1.8 प्रतिशत की गिरावट हुई है. यानी महंगाई ने दुनियाभर के Stock Markets को हिला कर रख दिया है.

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क्या कहते हैं रिटेल महंगाई दर के आंकड़े?

हाल ही में भारत में रिटेल महंगाई दर के नए आंकड़े जारी किए गए थे. जिसके तहत पिछले महीने यानी अप्रैल 2022 में रिटेल महंगाई दर 7.79 प्रतिशत दर्ज की गई थी. Retail महंगाई बढ़ने का सीधा सा मतलब ये है कि जब आप कोई सामान खरीदने बाजार जाते हैं तो वो आपको पहले से ज्यादा महंगा मिलता है. Retail Inflation में ये वृद्धि जुलाई 2014 के बाद से सबसे ज्यादा है. मई 2014 में ये दर 8.33 प्रतिशत थी. सरल शब्दों में कहें तो ये भारत में पिछले आठ साल का सबसे महंगाई वाला दौर है. भारत में रिटेल महंगाई दर का आंकलन, करीब 450 वस्तुओं और सेवाओं के बाजार भाव के हिसाब से किया जाता है और इनमें 45 प्रतिशत हिस्सा खाने और पीने की वस्तुओं का होता है. जैसे अनाज, दूध, सब्जियां, मिठाई, तेल, चिकन, मटन, मछली और अंडे. इसके अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा, यातायात और घर के निर्माण जैसी सेवाओं को भी इसमें शामिल किया जाता है.

ऐसे समझें महंगाई का गणित

फरवरी से अप्रैल महीने के बीच सब्जियों के दामों में लगभग 23 प्रतिशत से ज्यादा का इजाफा हुआ. यानी अगर पहले कोई सब्जी 100 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम पर मिल रही थी, तो अब उसकी कीमत 123 रुपये हो गई है. इसके अलावा जनवरी 2010 के बाद आटे की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है. भारत सरकार के मुताबिक, 9 मई को देश में एक किलोग्राम आटे की औसत कीमत लगभग 33 रुपये थी. जो पिछले साल की तुलना में चार रुपये ज्यादा है. इसके अलावा ऐसी भी खबरें हैं कि दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में एक किलो आटे की रिटेल कीमतें 50 रुपये तक पहुंच गई हैं.

पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने भी भारत के आम लोगों पर डाला असर

उदाहरण के लिए, देश की राजधानी दिल्ली में एक साल पहले एक लीटर पेट्रोल की कीमतें, 90 रुपये 44 पैसे थीं और एक महीने पहले तक भी इनमें ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई थी. लेकिन अब ये कीमतें 105 रुपये 45 पैसे हो गई हैं. डीजल की कीमतों में भी भारी इजाफा हुआ है. एक साल पहले दिल्ली में एक लीटर डीजल के दाम 80 रुपये 77 पैसे थे लेकिन अब ये कीमतें 96 रुपये के पार पहुंच गई हैं. साथ ही CNG की कीमतों में भी 69 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है और इसी तरह रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में भी लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. कुल मिला कर कहें तो भारत में महंगाई काफी बढ़ी है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या ऐसा सिर्फ भारत में ही हो रहा है? तो इसका जवाब है नहीं.

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