PM Narendra Modi ने लोहड़ी 2026 पर देशवासियों को दी हार्दिक शुभकामनाएं, प्रकृति और कृतज्ञता का संदेश दिया

PM Narendra Modi

नई दिल्ली, 13 जनवरी 2026

PM Narendra Modi ने मंगलवार को लोहड़ी के पावन अवसर पर देशवासियों को हार्दिक बधाई दी और इस त्योहार को प्रकृति के प्रति कृतज्ञता तथा समाज में आशावाद का प्रतीक बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने एक आकर्षक ग्राफिक के साथ संदेश साझा किया, जिसमें ढोल, गेहूं की बालियां और मिठाइयां जैसे पारंपरिक तत्व दिखाए गए थे।

पोस्ट में लिखा था, “लोहड़ी के पावन पर्व पर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। लोहड़ी प्रकृति का उत्सव है और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर। यह विशेष पर्व हमारे समाज में खुशी और आशावाद की भावना को और गहरा करे। लोहड़ी की गर्माहट हमें चारों तरफ नई उम्मीद और सद्भाव प्रेरित करे।”

इस पोस्ट पर PM Narendra Modi की हस्ताक्षर के साथ संदेश कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच गया और 48 हजार से अधिक लाइक्स तथा हजारों रीपोस्ट प्राप्त हुए। इसने लोहड़ी को केवल मौसमी उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति की दया के लिए धन्यवाद और विविध भारत में एकता का संदेश देने वाले पर्व के रूप में रेखांकित किया।

लोहड़ी 2026: सर्दी के अंत और फसल के स्वागत का उत्सव

इस वर्ष लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जा रही है, जो मकर संक्रांति से एक दिन पहले पड़ती है। दृक पंचांग के अनुसार, लोहड़ी संक्रांति का क्षण 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे होगा, लेकिन पारंपरिक रूप से उत्सव 13 जनवरी की शाम से शुरू हो जाता है। अलाव जलाने का शुभ मुहूर्त (गोधूलि मुहूर्त) शाम लगभग 5:41 बजे से 7:15 बजे तक रहेगा।

यह मध्य सर्दी का लोक पर्व मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और जम्मू में मनाया जाता है। यह सर्दी के संक्रांति के बाद के लंबे दिनों का स्वागत करता है और रबी फसलों जैसे गेहूं, सरसों तथा गन्ने की कटाई के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। किसान सूर्य देव और अग्नि देवता को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने भूमि को उर्वर बनाया और अच्छी फसल दी।

नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं वाले परिवारों के लिए लोहड़ी का विशेष महत्व है। नव दुल्हन या नए बच्चे की पहली लोहड़ी को बड़े उत्साह से मनाया जाता है, जिसमें उपहार और सामुदायिक आशीर्वाद की परंपरा होती है।

ऐतिहासिक कथाएं और सांस्कृतिक परंपराएं

लोहड़ी की जड़ें लोककथाओं में हैं। सबसे प्रसिद्ध कथा पंजाब के 16वीं शताब्दी के वीर योद्धा दुल्ला भट्टी की है, जिन्हें ‘पंजाब का रॉबिन हूड’ कहा जाता है। मुगल सम्राट अकबर के समय में दुल्ला भट्टी ने लड़कियों को गुलामी में बेचे जाने से बचाया, उनकी शादी करवाई और दहेज दिया। आज भी लोहड़ी के गीतों में उनका गुणगान होता है: “सुंदर मुंदरिये हो! तेरा कौन विचारा? दुल्ला भट्टी वाला…”

कुछ मान्यताओं के अनुसार यह पर्व संत कबीर दास की पत्नी लोई से जुड़ा है या ‘लोह’ (लोहे की तवा) से, जिस पर सामुदायिक भोज बनता है।

उत्सव की मुख्य विशेषता है खुले स्थान पर अलाव जलाना। लोग अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और तिल, गुड़, रेवड़ी, गजक, मूंगफली और पॉपकॉर्न चढ़ाते हैं। ये प्रसाद नए बीज बोने और समृद्धि की कामना का प्रतीक हैं।

लोहड़ी बिना नृत्य के अधूरी है। पुरुष भांगड़ा करते हैं तो महिलाएं गिद्धा। ढोल की थाप पर गाए जाने वाले लोकगीत फसल, प्रेम और वीरता की कहानियां सुनाते हैं।

देशभर में उत्सव और नेताओं की शुभकामनाएं

उत्तर भारत में, विशेषकर पंजाब में, ठंड के बावजूद लोहड़ी धूमधाम से मनाई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बड़े अलाव के आसपास जुटकर प्रसाद बांटते हैं। शहरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, पतंगबाजी की पूर्व तैयारी और परिवार के साथ भोज का आयोजन हो रहा है। भोजन में सरसों का साग, मक्की की रोटी और गुड़ की रोटी प्रमुख हैं।

प्रधानमंत्री के अलावा कई केंद्रीय मंत्रियों और पंजाब-हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने भी शुभकामनाएं दीं। सभी ने एकता और कृषि समृद्धि का संदेश दिया। सिख समुदाय में लोहड़ी के अगले दिन माघी मनाई जाती है, जो चाली मुक्तों की शहादत की याद दिलाती है।

तमिलनाडु में पोंगल और असम में भोगाली बिहू जैसे समान फसल उत्सव भी इसी समय मनाए जा रहे हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं।

चुनौतीपूर्ण समय में आशा का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाएं त्योहार के मूल भाव – प्रकृति के उपहारों के लिए कृतज्ञता और समाज में सद्भाव – से पूरी तरह मेल खाती हैं। जलवायु परिवर्तन के दौर में लोहड़ी हमें अपनी कृषि जड़ों की याद दिलाती है।

जैसे-जैसे रात के आकाश में अलाव की लपटें चमक रही हैं, लोहड़ी 2026 न केवल आग की गर्माहट ला रही है, बल्कि साझा खुशी, सांस्कृतिक गौरव और नए साल की समृद्धि की उम्मीद भी जगा रही है। यह अंधेरे पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है।

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