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  • Revealed In The Investigation Of JDU Itself, The State President Wrote – Irregularities In Huge Assets
पटना12 मिनट पहलेलेखक: मधुरेश

जदयू ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रहे आरसीपी सिंह के खिलाफ बाकायदा कार्रवाई को कमोबेश मुकाम तक पहुंचा दिया है। कार्रवाई का आधार उनकी और उनके घर वालों की हाल की संपत्ति है। दिलचस्प यह है कि इस संपत्ति का ब्योरा जदयू के ही नेताओं ने जुटाया है।

इसके अनुसार, आरसीपी और उनके घर वालों ने 2013 से अब तक नालंदा जिले के सिर्फ दो प्रखंड अस्थावां और इस्लामपुर में करीब 40 बीघा जमीन खरीदी है। कई और जिलों में भी उनकी संपत्ति होने की बात भी कही गई है।

पार्टी ने इसे भ्रष्टाचार के मोर्चे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के खिलाफ माना है। अपने ही पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ जांच करने और उनसे भ्रष्टाचार संबंधी सवाल-जवाब करने वाली जदयू हालिया वर्षों में संभवत: देश की पहली पार्टी है।

35 पन्नों में जमीन की खरीद और इससे जुड़ी जानकारी

चुनावी हलफनामे में भी जिक्र नहीं
जदयू सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने आरसीपी को पत्र भी लिखा है। इसमें बताया गया है कि नालंदा जिले में जदयू के दो साथियों की सबूत के साथ शिकायत मिली है। इसमें बताया गया है कि अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार आपके और आपके परिवार के नाम से साल 2013 से 2022 तक अकूत संपत्ति रजिस्टर्ड कराई गई है। इसमें कई प्रकार की अनियमितता दिखाई देती हैं। … आप लंबे समय तक दल के सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार के साथ अधिकारी और राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहे हैं।

आपको, हमारे माननीय नेता ने दो बार राज्यसभा का सदस्य, पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव (संगठन), राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा केंद्र में मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर, पूर्ण विश्वास एवं भरोसे के साथ दिया। आप इस तथ्य से भी अवगत हैं कि माननीय नेता, भ्रष्टाचार के जीरो टॉलरेंस पर काम करते रहे हैं और इतने लंबे सार्वजनिक जीवन के बावजूद उन पर कभी दाग नहीं लगा और न उन्होंने कोई संपत्ति बनाई। पार्टी आपसे अपेक्षा करती है कि इस परिवाद के बिंदुओं पर बिंदुवार अपनी स्पष्ट राय से पार्टी को तत्काल अवगत कराएंगे।

ज्यादातर जमीन पत्नी और दोनों बेटियों के नाम पर

खरीदी गई ज्यादातर जमीनें आरसीपी सिंह की पत्नी (गिरजा सिंह) और दोनों बेटियों (लिपि सिंह, लता सिंह) के नाम पर है। एक आरोप यह भी है कि आरसीपी ने खासकर 2016 के अपने चुनावी हलफनामे में इसका जिक्र नहीं किया है।

वो छह सवाल, जो आरसीपी सिंह से पूछने थे… लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया

1. क्या नालंदा के सिर्फ दो प्रखंड अस्थावां और इस्लामपुर में 2013 से अब तक करीब 40 बीघा जमीन आपने खरीदी है?

2. क्या आपने वाजिब आमदनी के बूते यह संपत्ति बनाई है? चूंकि पार्टी ने आपकी इस खरीद को अनियमितता बताया है?

3. ज्यादातर जमीनें आपकी पत्नी और दोनों बेटियों के नाम पर हैं। आपने 2016 के चुनावी हलफनामे में इसका जिक्र नहीं किया। क्यों?

4. कुछ ऐसी जमीनें भी खरीदने की बात है, जो किसी ने किसी को दान दी थी और दान लेने वाले ने आपको बेच दी?

5. किसी एक ने दूसरे से जमीन खरीदी और फिर कुछ दिनों में आपकी दोनों बेटियों को क्यों बेच दी?

6. कई संपत्तियों की खरीद के वक्त आपकी बेटी लिपि सिंह की शादी नहीं हुई थी। दस्तावेज में आपकी सिर्फ आपकी पत्नी का नाम है। क्यों?

(दैनिक भास्कर टीम ने आरसीपी से मोबाइल पर कई बार संपर्क करने की कोशिश की। उनके वॉट्सऐप पर सवाल भी भेजे। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया)

इस्लामपुर अंचल में 2013 से 2016 में खरीदे गए 24 प्लॉट

इस्लामपुर (हिलसा) अंचल के सैफाबाद मौजा में 12 और केवाली अंचल में 12 प्लॉट खरीदे गए। यह खरीद 2013 से 2016 के दौरान हुई। ये प्लॉट लिपि सिंह और लता सिंह के नाम पर खरीदे गए। 28 अप्रैल 2014 को चरकावां (नीमचक बथानी, गया) के नरेश प्रसाद सिंह ने बेलधर बिगहा (छबीलापुर, नालंदा) के धर्मेंद्र कुमार को दान में जमीन दी। बाद में धर्मेंद्र कुमार ने यही जमीन लिपि सिंह और लता सिंह के नाम बेच दी।

एक से खरीदी और तीन दिन बाद उनके परिजनों को बेची

4 सितंबर 2014 एवं 15 सितंबर 2014 को सिलाव (नालंदा) के बिशेश्वर साव ने 2 प्लॉट खरीदे। और 3 दिन बाद यानी 18 सितंबर को ये दोनों प्लॉट लिपि सिंह और लता सिंह के नाम बेच दिए। ऐसे 2 और मामले हैं, जिसमें 6 दिन और 8 महीने में दूसरे से खरीदी गई जमीनों को खरीदने वाले ने लता सिंह और लिपि सिंह को जमीन बेच दिया गया। कुल 35 पन्नों में जमीन की खरीद और इससे जुड़े दूसरे विवरण हैं।

अस्थावां में खरीदे 34 प्लॉट, पिता आरसीपी का ही नाम

जदयू के दस्तावेज के अनुसार, अस्थावां के शेरपुर मालती मौजा में 33 प्लॉट की खरीद हुई। इनमें 4 प्लॉट 2011- 2013 में लता सिंह और लिपि सिंह के नाम पर खरीदे गए। पिता के रूप में आरसीपी सिंह का नाम है। बाकी 12 प्लॉट गिरजा सिंह और 18 प्लॉट लता सिंह के नाम पर खरीदे गए। महमदपुर में 2015 में एक प्लॉट गिरजा सिंह के नाम पर खरीदा गया। 2011 में 2, 2013 में 2, 2014 में 5, 2015 में 6, 2017 में 1, 2018 में 3, 2019 में 4, 2020 में 3, 2021 में 6 तथा 2022 में 2 प्लॉट खरीदे गए।

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