Rigging in 2017 recruitment: passed in 58 words per minute typing Banda Agriculture University and failed in 75 words per minute

0
41
Advertisement

Advertisement
ऐप पर पढ़ें
बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में वर्ष 2017 में भर्ती में धांधली सामने आई है। स्टेनोग्राफर के नौ पदों के लिए चयन में 58 शब्द प्रति मिनट टाइप करने वाले को चयनित कर लिया गया जबकि 75 शब्द प्रति मिनट टाइप करने वाले फेल कर दिए गए। इसकी पुष्टि आयुक्त के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में की है। इस मामले में शासन से पहली जांच 21 अगस्त 2018 को आई। तत्कालीन आयुक्त गौरव दयाल ने एडीएम, सीटीओ और अपर निदेशक बेसिक शिक्षा की तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई। एक सितंबर 2019 को जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई। इसके बाद 22 जनवरी 2020 को दोबारा शासन से भर्ती धांधली की जांच कराई गई। दूसरी बार जांच पूरी कर रिपोर्ट चार दिसंबर 2020 को शासन को भेजी गई। जांच रिपोर्ट से साफ है कि स्टेनोग्राफर और ड्राइवर भर्ती अर्हता को दरकिनार कर की गई है। बता दें कि वर्ष 2017 में नियुक्ति तत्कालीन कुलपति डॉ. एसएल गोस्वामी के कार्यकाल में हुई थी। नियुक्तियां तत्कालीन निदेशक प्रशासन एवं अनुश्रवण डॉ.एनके बाजपेई ने की थी। वर्तमान में बाजपेई निदेशक प्रसार के पद पर तैनात हैं। वर्ष 2017 भर्ती विवाद के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था।

डीएल की वैधता खत्म फिर भी ड्राइवर पद पर चयन

40 पद में नौ पद पर वाहन ड्राइवर के लिए चयन प्रक्रिया हुई थी। उन ड्राइवरों का चयन किया गया, जिनका लाइसेंस आवेदन के वक्त से तीन साल पहले ही एक्सपायर हो गया था। यहां तक कि बिना हैवी लाइसेंस और लर्निंग लाइसेंस वालों का भी चयन कर लिया गया था। यह चयन तत्कालीन कृषि महाविद्यालय विवि में सुनील कुमार, फार्म इंचार्ज विवि डॉ. बीके गुप्ता, उद्यान महाविद्यालय कृषि विवि में सहायक डॉ.ओम प्रकाश और विशेषज्ञ आरटीओ बांदा ने किए थे।

अभी जांच रिपोर्ट नहीं मिली

विवि के एक अधिकारी ने बताया कि शासन से विशेष सचिव देवेंद्र कुमार सिंह कुशवाहा का पत्र मिला है, पर धांधली और गंभीर अनियमितता की जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विधिक राय लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विशेष सचिव के पत्र में साफ है कि विश्विद्यालय द्वारा चयन प्रक्रिया अनियमित थी। अनियमितता के लिए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाए और उत्तरदायी अधिकारियों और कार्मिकों से की जाए। उधर, इस मामले में विवि वीसी डॉ. एनपी सिंह से लेकर कुलसचिव समेत तमाम प्रशासनिक अफसर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।

Source link

Advertisement

Leave a Reply