Sachin Pilot Ashok Gehlot Rajasthan Crisis Chief Minister Update Bharat Jodo Yatra Rahul Gandhi – India Hindi News

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Sachin Pilot vs Ashok Gehlot: राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट को लेकर विवाद जारी है। पायलट समर्थक कांग्रेस आलाकमान से उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। अब पूरे विवाद की आंच राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर भी आ गई है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के नेता विजय सिंह बैंसला ने राजस्थान में राहुल गांधी की यात्रा की विरोध की धमकी दी है। उन्होंने पायलट को जल्द मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है। बैंसला इकलौते या पहले नहीं है, जोकि पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। 25 सितंबर को अशोक गहलोत के करीबियों द्वारा की गई बगावत के बाद पायलट को सीएम बनाने की मांग ने काफी जोर पकड़ा है। पायलट समर्थक कई मंत्री भी मुख्यमंत्री बदलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं, जिससे लगे कि वह जल्द कोई बदलाव करने वाली है। हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कांग्रेस को सचिन पायलट को लेकर जल्द से जल्द फैसला कर लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर पंजाब की तरह बहुत देर हो सकती है।

पायलट के हक में फैसला क्यों नहीं कर पा रहा आलाकमान?

सचिन पायलट को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का काफी करीबी माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, सचिन को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाए जाने का आश्वासन भी मिला है। मालूम हो कि पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजस्थान संकट को हल करने की सितंबर में ही कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हो सकीं। 25 सितंबर को दिल्ली से मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाने के लिए राजस्थान भेजा गया, लेकिन गहलोत के करीबी विधायकों ने शांतिलाल धारीवाल के घर बैठक करके ऐसा होने नहीं दिया। बगावत के बाद गांधी परिवार अशोक गहलोत से और नाराज हो गया, जिसके चलते उनका नाम कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से हट गया और माफी तक मांगनी पड़ी। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि गांधी परिवार राजस्थान में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के पूरे मूड में है, लेकिन गहलोत के अड़े रहने की वजह से यह फैसला नहीं हो पा रहा है। गहलोत और सचिन पायलट के बीच 36 का आंकड़ा है और गहलोत किसी भी कीमत पर पायलट को सीएम नहीं बनने देना चाहते। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान को डर है कि यदि पंजाब की तरह कोई जोर-जबरदस्ती करके गहलोत के खिलाफ कोई फैसला लिया जाता है, तो कहीं वे अपने विधायकों के साथ पार्टी न तोड़ दें। वैसे भी ज्यादातर विधायकों के इस्तीफे विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी के पास अब भी हैं और उन्हें वापस नहीं लिया गया है।

गुजरात इलेक्शन और भारत जोड़ो यात्रा का इंतजार

वहीं, कांग्रेस पर करीब से नजर रखने वालों का मानना है कि राजस्थान संकट को हल नहीं किए जाने के पीछे दरअसल दो बड़ी वजह हैं। राजस्थान में चंद दिनों बाद भारत जोड़ो यात्रा आने वाली है। पार्टी यह नहीं चाहती कि उसके पहले गहलोत और उनके विधायकों को नाराज किया जाए और यात्रा से ध्यान हटकर किसी और मुद्दे पर ध्यान चला जाए। पार्टी इस समय सचिन और गहलोत, दोनों गुटों को एक साथ रखना चाहती है ताकि राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा को सफल दिखाया जा सके। वहीं, सचिन पायलट पर फैसला नहीं लेने के पीछे एक वजह अशोक गहलोत का गुजरात चुनाव का सीनियर ऑब्जर्वर होना है। गुजरात में अगले कुछ दिनों में ही वोटिंग होने वाली है और पूरे राज्य की कमान गहलोत के हाथ में है। वहीं, राजस्थान के ही नेता रघु शर्मा को भी प्रभारी बनाया गया है। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान हड़बड़ी में कोई भी फैसला लेकर पार्टी को नुकसान पहुंचाना नहीं चाहेगा।

पायलट पर जल्द फैसला करना कांग्रेस के लिए क्यों जरूरी?

ऐसा नहीं है कि सचिन पायलट पर फैसला नहीं करने से कांग्रेस को फायदा ही मिलेगा। पायलट पर जल्द फैसला करना भी काफी जरूरी है। दरअसल, अगले साल राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस का आंतरिक सर्वे भी सचिन पायलट के हक में है। राजस्थान में चेहरा नहीं बदला गया तो कांग्रेस को अगले चुनाव में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि पायलट को सीएम बनाने का मन कांग्रेस ने कर लिया है तो जल्द इसे लागू करना होगा, नहीं तो ज्यादा समय बीतने के बाद पंजाब वाला हाल हो सकता है। पंजाब में भी कैप्टन अमरिंदर और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच का विवाद इतना लंबा खिंच गया था कि जब चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया गया तो उन्हें सरकार चलाने और योजनाओं को लागू करने का ज्यादा समय नहीं मिला। ऐसे में यदि पायलट को सीएम बनाना है तो जल्दी बनाना होगा, ताकि उन्हें योजनाओं को लागू करने का कुछ समय मिल सके। 

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