Top Interesting Facts about Mobile Phone in hindi | आपका मोबाइल टॉयलेट के हैंडल से भी है ज्यादा गंदा! जानिए मोबाइल से जुड़े 10 दिलचस्प Facts

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सबसे पहले मोबाइल फ़ोन की कीमत इतनी थी

मार्टिन कूपर ने 1983 में सबसे पहले मोबाइल फ़ोन का आविष्कार किया था। इस पहले मोबाइल फ़ोन की कीमत लगभग $4,000 (या £2,500) रखी गई, यानि आज के मुक़ाबले करीब 2.50 लाख रुपये थी।

मोबाइल फोन टॉयलेट के हैंडल से ज्यादा गंदे होते हैं

आज मोबाइल फ़ोन हमारे साथ लगभग हर जगह जाते हैं, जिसका मतलब है कि यह रास्ते में कीटाणुओं के भी संपर्क में आते हैं। आप जिस मोबाइल को दिन-रात इस्तेमाल करते हैं वो आपके टॉयलेट सीट के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा गंदा होता है। इसलिए अगली बार जब भी आप अपने मोबाइल फ़ोन यूज़ करें,तो उससे पहले साफ़ करना न भूलें।

आपका मोबाइल एक अंतरिक्ष यान से अधिक शक्तिशाली है

स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां आये दिन फ़ोन में इस्तेमाल होने वाले प्रोसेसर को और बेहतर करने में लगी हुई हैं। क्या आपका पता है की NASA के अनुसार, अपोलो 11 मून लैंडिंग के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले कंप्यूटर की तुलना मैं आज के नॉर्मल मोबाइल फ़ोन में ज़्यादा कंप्यूटिंग शक्ति होती है।

Apple ने सिर्फ एक दिन में 3,40,000 iPhone बेचे थे

आईफ़ोन किसे नहीं पसंद और iPhone 14 सीरीज के लॉन्च ने फिर इस बात की पुष्टि कर दी है। लेकिन 2012 में लॉन्च हुए iPhone ने बिक्री के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। Apple ने उस समय 340,000 iPhones बेचे थे,जिसकी वैल्यू 125 मिलियन से भी ज़्यादा थी।

वैज्ञानिक मूत्र का इस्तेमाल कर फोन चार्ज कर सकते हैं

ब्रिस्टल में वैज्ञानिकों ने मूत्र का उपयोग करके फोन चार्ज करने का एक तरीका खोजा है। रिसर्चर्स की माने तो, चार्जिंग के लिए आने वाले समय में एनर्जी हासिल और स्टोर करने के लिए ‘स्मार्ट टॉयलेट्स’ का इस्तेमाल करना शामिल हो सकता है।

पहले मोबाइल फोन का वजन कितना था ?

आजकल दुनिया भर में मोबाइल फ़ोन निर्माता कंपनियां फ़ोन का वज़न कम करने में लगी हुई है। मार्किट में भी लोग कॉम्पैक्ट और हल्का फ़ोन लेना ही पसंद करते हैं। हालाँकि,आपको जानकार हैरानी होगी कि पहले मोबाइल फोन का वजन लगभग 2.5lbs यानि करीब 1.2 किलो था। अब ज़रा सोचिये कि आप इतने भारी फ़ोन को अपनी जेब में रख कर कैसे चल पाते।

आपके फोन के बिना होने का डर असली है

मोबाइल फ़ोन की इतनी आदत लग चुकी है,कि लोग अब इसके बिना रह नहीं पाते। जैसे कि अगर फ़ोन को खो जाए या फिर बैटरी ख़त्म हो जाए तो लोग बेचैन हो जाते हैं। अगर आपको भी फ़ोन के खो जाने पर डर लगता है तो यह चौंकाने वाली बात नहीं है क्योंकि इस तरह की घटना/डर लगने को नोमोफोबिया कहते हैं। यह शब्द ‘नो मोबाइल फ़ोबिया’ वाक्यांश का एक जोड़ है।

Nokia को मोर्स कोड पसंद था

आज भी जब हम नोकिया ब्रांड के बारे में बात करते हैं,तो सबसे पहले स्नेक गेम ही याद आती है, लेकिन उससे भी जरूरी और यादगार चीज़ थी, वो नोकिया की रिंगटोनथी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नोकिया रिंगटोन वास्तव में मोर्स कोड में एसएमएस थी। हमें ये जानकारी नहीं थी, क्या आपको पता था ?

क्या आपका मोबाइल फोन सच में बज रहा है?

कई बार हम सब ने कभी-कभी यह महसूस किया होगा कि हमारा फ़ोन बज रहा है। कई लोग तो जेब से फ़ोन निकाल कर चेक भी करते हैं,कि वास्तव में उनका फ़ोन बज रहा है या ये सिर्फ उनका वहम है। आपको बता दें, रिंगक्सिटी वास्तव में एक वास्तविक मनो-ध्वनिक तथ्य है। यह आप तब फील करते हैं,जब आप महसूस करना चाहते हैं कि आप अपने मोबाइल की रिंगटोन को महसूस और सुन सकते हैं।

iPhone का फिंगरप्रिंट सेंसर

Apple iPhone का फिंगरप्रिंट सेंसर किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति के फिंगरप्रिंट में अंतर बता सकता है। यह टेक्नोलॉजी वर्तमान में सिर्फ एप्पल कंपनी के पास है।

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