UA-IRAN : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बड़ी खबर आई है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच सभी राजनयिक संपर्क निलंबित कर दिए गए हैं। इस विकास के बाद भारत सरकार ने अपने नागरिकों को तत्काल प्रभाव से ईरान छोड़ने की सलाह जारी की है। वहीं, रूस ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि ईरान पर कोई भी सैन्य कार्रवाई “पूर्ण रूप से अस्वीकार्य” होगी।
यह जानकारी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जहां कई यूजर्स इसे संभावित बड़े संघर्ष का संकेत बता रहे हैं। हालांकि, प्रमुख समाचार एजेंसियों और आधिकारिक सरकारी स्रोतों से इसकी तत्काल पुष्टि नहीं मिली है। विदेश मंत्रालय और अमेरिकी राज्य विभाग की वेबसाइटों पर भी इस संबंध में कोई नवीनतम आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है।
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। 2018 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध और बिगड़ गए। हाल के वर्षों में इजरायल-हमास संघर्ष, हूती विद्रोहियों के हमले और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर है।
2025 के अंत में कुछ घटनाओं, जैसे लाल सागर में जहाजों पर हमले और इजरायल द्वारा ईरान समर्थित ठिकानों पर कार्रवाई, ने स्थिति को और जटिल बनाया है। यदि राजनयिक संपर्क वाकई निलंबित हुए हैं, तो यह सीधे सैन्य टकराव की ओर इशारा कर सकता है।
भारत का ईरान से गहरा संबंध है, विशेषकर ऊर्जा आयात और चाबहार बंदरगाह परियोजना के संदर्भ में। हजारों भारतीय नागरिक ईरान में काम करते हैं या अध्ययन करते हैं। विदेश मंत्रालय अक्सर क्षेत्रीय तनाव के समय ट्रैवल एडवाइजरी जारी करता है, जिसमें नागरिकों को सतर्क रहने और गैर-जरूरी यात्रा टालने की सलाह दी जाती है। यदि यह एडवाइजरी जारी हुई है, तो यह भारतीय दूतावास तेहरान की ओर से हो सकती है, जिसमें नागरिकों से पंजीकरण कराने और निकासी की तैयारी करने को कहा गया होगा।
UA-IRAN : रूस की चेतावनी और वैश्विक प्रतिक्रियाएं
रूस, जो ईरान का करीबी सहयोगी है, ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है कि ईरान पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रूसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे “अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरा होगा। रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा है, विशेषकर यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में।
चीन, जो भी ईरान का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, ने संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कई देश शांति वार्ता की वकालत कर रहे हैं, जबकि इजरायल और कुछ पश्चिमी देश ईरान के परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर सख्त रुख अपनाए हुए हैं।
सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ यूजर्स इसे “बड़ी जंग की शुरुआत” बता रहे हैं, तो कुछ इसे मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति मान रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “रूस और चीन केवल निंदा करेंगे, कुछ और नहीं।” जबकि दूसरे ने कहा, “भारत अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में माहिर है।”
भारत की भूमिका और नागरिकों की सुरक्षा
भारत ने हमेशा अपने नागरिकों की overseas सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। चाहे यूक्रेन संकट हो, सूडान संघर्ष या अफगानिस्तान निकासी, भारत ने ऑपरेशन जैसे ‘वंदे भारत’ और ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ से लाखों लोगों को सुरक्षित निकाला है। यदि ईरान में स्थिति बिगड़ी, तो भारत विशेष उड़ानें या निकासी योजना शुरू कर सकता है।
वर्तमान में, भारतीय दूतावास तेहरान भारतीयों से संपर्क में रहने और स्थानीय कानूनों का पालन करने की सलाह देता रहता है। नागरिकों को MEA की हेल्पलाइन या दूतावास से संपर्क करने को कहा जाता है।
यह विकास यदि सत्य है, तो तेल कीमतों में उछाल, क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। भारत, जो मध्य पूर्व से बड़ा तेल आयात करता है, सतर्क नजर रखे हुए है।
हालांकि, यह खबर मुख्य रूप से सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है और आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है। प्रमुख न्यूज आउटलेट्स जैसे रॉयटर्स, एपी, बीबीसी या एएनआई से इसकी कवरेज नहीं मिली है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसी खबरों पर आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि तक इंतजार करें।
मध्य पूर्व की स्थिति नाजुक है और किसी भी बड़े घटनाक्रम से वैश्विक शांति प्रभावित हो सकती है। भारत शांति और संयम की अपील करता रहा है।
