PGIMS Rohtak: 3 साल के बच्चे के फेफड़े से बिना ऑपरेशन निकाला लोहे का पेंच, डॉक्टरों ने बचाई जान
रोहतक | हरियाणा के PGIMS Rohtak के ईएनटी विभाग ने एक बेहद दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर तीन वर्षीय मासूम की जान बचा ली। बच्चे के फेफड़े की सांस की नली में लोहे का पेंच फंसा हुआ था, जिसकी जानकारी न तो परिवार को थी और न ही बच्चे में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई दे रहे थे। डॉक्टरों ने बिना शरीर पर कोई चीरा लगाए आधुनिक रीजिड ब्रोंकोस्कोपी (Rigid Bronchoscopy) तकनीक से पेंच को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
कैसे हुआ मामले का खुलासा?
ईएनटी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. रमन वडेरा के अनुसार, नारनौल निवासी करीब तीन वर्षीय बच्चे (बदला हुआ नाम अनंत) की 13 जुलाई 2026 को बिस्तर से गिरने के कारण बाईं जांघ की हड्डी टूट गई थी। प्रारंभिक इलाज के बाद 23 जुलाई को ऑपरेशन से पहले कराए गए रूटीन छाती के एक्स-रे में डॉक्टरों को दाहिने फेफड़े की सांस की नली में धातु का पेंच दिखाई दिया।
इसके बाद किए गए सीटी स्कैन में पुष्टि हुई कि पेंच ब्रोंकस इंटरमीडियस में फंसा हुआ है। यदि समय रहते इसे नहीं निकाला जाता, तो यह किसी भी समय सांस की नली को पूरी तरह बंद कर सकता था और बच्चे की जान को खतरा हो सकता था।
बिना चीरे के दो घंटे चला ऑपरेशन
डॉ. रमन वडेरा और उनकी विशेषज्ञ टीम ने जनरल एनेस्थीसिया के तहत करीब दो घंटे तक चले ऑपरेशन में रीजिड ब्रोंकोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल किया। गले के रास्ते विशेष उपकरण डालकर बिना किसी चीरे के पेंच को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और बच्चा तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
बच्चों के लिए क्यों खतरनाक हैं छोटे धातु के सामान?
डॉ. वडेरा ने बताया कि छह महीने से अधिक उम्र के बच्चे अक्सर छोटी-छोटी वस्तुएं मुंह में डाल लेते हैं। पेंच, नट-बोल्ट, सिक्के, बटन बैटरी और खिलौनों के छोटे हिस्से बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। कई बार सांस की नली में वस्तु फंसने के बाद भी खांसी, घुटन या अन्य लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
PGIMS Rohtak में उपलब्ध हैं आधुनिक सुविधाएं
ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. जगत सिंह ने बताया कि कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल और निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल के नेतृत्व में संस्थान में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उपलब्ध है। यही वजह है कि हरियाणा के साथ-साथ आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं।
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने क्या कहा?
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि PGIMS Rohtak प्रदेश का प्रमुख रेफरल सेंटर है, जहां 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू, वेंटिलेटर, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे दुर्लभ मामलों में समय पर जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ही मरीज की जान बचा सकती है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि छोटे बच्चों को पेंच, सिक्के, बैटरी और खिलौनों के छोटे हिस्सों से दूर रखें, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
मुख्य बातें (Highlights)
- 3 वर्षीय बच्चे के फेफड़े में फंसा था लोहे का पेंच।
- जांघ के ऑपरेशन से पहले एक्स-रे में हुआ खुलासा।
- PGIMS रोहतक के डॉक्टरों ने बिना चीरा लगाए निकाला पेंच।
- रीजिड ब्रोंकोस्कोपी तकनीक से सफल रहा ऑपरेशन।
- डॉक्टरों ने अभिभावकों को छोटे सामान बच्चों से दूर रखने की सलाह दी।






