नई दिल्ली, एग्रो केम फेडरेशन ऑफ इंडिया (ACFI ने सरकार से फसल सुरक्षा क्षेत्र के लिए लक्षित और समयबद्ध नीति ढांचा लागू करने की मांग की है। संगठन के अनुसार अपस्ट्रीम विनिर्माण मजबूत करने के लिए करीब 5,000 से 7,500 करोड़ रुपये के सहायता कार्यक्रम की जरूरत है, ताकि एग्रोकेमिकल टेक्निकल्स और इंटरमीडिएट्स में आत्मनिर्भरता बढ़े, चीन के मुकाबले उपयोगिता लागत का फर्क घटे और बैकवर्ड इंटीग्रेशन तेज हो।
ACFI और केपीएमजी ने संयुक्त रूप से रिपोर्ट जारी की है — “रीडिफाइनिंग इंडियन क्रॉप प्रोटेक्शन थ्रू इनोवेशन: फ्रॉम स्केल टू साइंस”। रिपोर्ट कहती है कि औद्योगिक नीति का मकसद स्थायी सब्सिडी नहीं, बल्कि उन स्पष्ट कमियों को दूर करना होना चाहिए जो भारतीय विनिर्माण की वैश्विक प्रतिस्पर्धा घटाती हैं।
ACFI चेयरमैन राहुल धनुका ने कहा कि ध्यान किसानों की वास्तविक जरूरत पर रहना चाहिए। इसके लिए नवाचार को बढ़ावा देने वाला नियामक ढांचा, घरेलू क्षमता, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटलीकरण और टिकाऊ कृषि जरूरी है। नवाचार तभी सफल होगा जब समाधान किसान तक प्रभावी, सुलभ और भरोसेमंद रूप में पहुंचे।
रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें
रिपोर्ट 7-8 साल की सहायता अवधि सुझाती है। इसमें प्लांट लगाने और शुरू करने के लिए 2-3 साल तथा उसके बाद उत्पादन सहायता शामिल हो। बड़े उद्योग और एमएसएमई दोनों के लिए अलग निवेश श्रेणियां हों। योजना ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड विस्तार पर लागू हो।
पीएलआई की तर्ज पर अतिरिक्त बिक्री पर 5-8 प्रतिशत प्रोत्साहन, औद्योगिक बिजली पर 30-40 प्रतिशत सब्सिडी और साझा ईफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) पर सहायता का सुझाव दिया गया है। विशेष आरएंडडी के लिए पूंजीगत अनुदान भी मांगा गया है।
अन्य मांगों में शामिल हैं:
- साझा सुविधाओं वाले विशेष एग्रोकेमिकल मैन्युफैक्चरिंग पार्क
- क्लस्टर आधारित पर्यावरणीय बुनियादी ढांचा
- दीर्घकालिक वित्त
- महत्वपूर्ण इंटरमीडिएट्स में चुनिंदा बैकवर्ड इंटीग्रेशन
- केंद्र-राज्य मंजूरियों के लिए सिंगल-विंडो डिजिटल व्यवस्था
- जैविक फसल सुरक्षा उत्पादों के लिए स्पष्ट नियमन
रिपोर्ट के मुताबिक भारत विनिर्माण में मजबूत है, लेकिन अगला चरण केवल क्षमता बढ़ाने का नहीं है। उत्पाद विकास, बायोलॉजिकल्स, उन्नत फॉर्मुलेशन, रेगुलेटरी साइंस और डिजिटल कृषि में क्षमता बढ़ानी होगी। जैविक फसल सुरक्षा को बड़ा अवसर बताया गया है, बशर्ते गुणवत्ता एकरूपता, फॉर्मुलेशन स्थिरता, बड़े पैमाने पर उत्पादन और किसानों द्वारा अपनाया जाना सुनिश्चित हो।
एजीएम के बाद “द इनविजिबल रिवोल्यूशन: हाउ इनोवेशन इज फीडिंग इंडिया” विषय पर पैनल चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि नवाचार वैज्ञानिक रूप से मजबूत होने के साथ किसान के लिए लाभदायक और सुरक्षित भी होना चाहिए। बायोटेक, नैनो, डिजिटल टूल्स और फसल पोषण को अलग-अलग नहीं, एक साथ जोड़कर काम करना होगा।
ACFI भारत के एग्रोकेमिकल उद्योग के करीब 85 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन किसानों को पौध संरक्षण रसायनों के सही इस्तेमाल की जानकारी देने पर भी काम करता है।
