लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार अब रजिस्ट्री कार्यालयों को पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर उप-निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालयों को चरणबद्ध तरीके से हाईटेक बनाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
मुख्य फैसले:
- रजिस्ट्री कार्यालयों में पेपरलेस डिजिटल व्यवस्था लागू होगी।
- हेल्प डेस्क, टोकन सिस्टम, क्यू मैनेजमेंट, AC वेटिंग रूम, महिला एवं शिशु कक्ष जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
- बुजुर्गों, महिलाओं और आम नागरिकों को बिना किसी परेशानी के काम निपटाने की व्यवस्था।
- बायोमेट्रिक, आईरिस आधारित सत्यापन, जियो-टैगिंग, AI आधारित सिस्टम और खतौनी आधारित डिजिटल जांच लागू होगी।
राजस्व में अभूतपूर्व वृद्धि
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में बताया कि:
- वर्ष 2016-17 में स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग का राजस्व 11,613 करोड़ रुपये था।
- वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 32,598 करोड़ रुपये हो गया है (लगभग 3 गुना वृद्धि)।
- पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 28.25 लाख से बढ़कर 49.34 लाख हो गई।
और क्या होगा?
- पुराने अभिलेखों का 100% डिजिटाइजेशन।
- संपत्ति मूल्यांकन में मानकीकृत (स्टैंडर्ड) व्यवस्था।
- निवेशकों के लिए Ease of Doing Business को बढ़ावा देने वाला स्टाम्प शुल्क ढांचा।
- विवाह और संपत्ति पंजीकरण में मजबूत डिजिटल सत्यापन से भ्रष्टाचार पर लगाम।
सीएम योगी ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय आम जनता के सबसे ज्यादा संपर्क में आने वाले कार्यालय हैं, इसलिए इन्हें नागरिक केंद्रित और पूर्ण पारदर्शी बनाना जरूरी है।
✅ विस्तृत समाचार
यूपी के रजिस्ट्री कार्यालय पासपोर्ट सेंटरों की तर्ज पर होंगे हाईटेक, CM योगी के सख्त निर्देश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार अब आम जनता के सबसे ज्यादा संपर्क में आने वाले स्टाम्प एवं पंजीयन (रजिस्ट्री) कार्यालयों को पूरी तरह आधुनिक बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर सभी उप-निबंधक कार्यालयों को चरणबद्ध तरीके से हाईटेक बनाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभागीय समीक्षा बैठक में कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय नागरिकों के लिए सुविधा केंद्र होने चाहिए, न कि परेशानी का सबब। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि:
- सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में पेपरलेस डिजिटल व्यवस्था लागू की जाए।
- टोकन सिस्टम, क्यू मैनेजमेंट, हेल्प डेस्क, AC वेटिंग एरिया, महिला एवं शिशु कक्ष जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था की जाए।
नई डिजिटल तकनीकें जो लागू होंगी:
- बायोमेट्रिक सत्यापन — आधार आधारित e-KYC, फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैनिंग।
- जियो-टैगिंग — संपत्ति की लोकेशन GPS से वेरिफाई।
- AI आधारित सिस्टम — दस्तावेज की स्वतः जांच और फ्रॉड डिटेक्शन।
- NGDRS (National Generic Document Registration System) के माध्यम से पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन।
- पुराने रजिस्ट्री अभिलेखों का 100% डिजिटाइजेशन।
- खतौनी, भूलेख और नगर निकाय रिकॉर्ड से API इंटीग्रेशन।
- ई-स्टाम्प, डिजिटल सिग्नेचर और मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा।
राजस्व में जबरदस्त बढ़ोतरी
सीएम योगी ने बैठक में बताया कि:
- वर्ष 2016-17 में विभाग का राजस्व केवल 11,613 करोड़ रुपये था।
- वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 32,598 करोड़ रुपये हो गया है — यानी लगभग तीन गुना वृद्धि।
- पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 28.25 लाख से बढ़कर 49.34 लाख हो गई।
सरकार का लक्ष्य है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त और तेज हो। इससे निवेशकों को Ease of Doing Business में सुविधा मिलेगी और आम नागरिकों को बिना किसी परेशानी के संपत्ति रजिस्ट्री, विवाह पंजीकरण आदि काम निपटाने में आसानी होगी।
“रजिस्ट्री कार्यालय अब नागरिक केंद्र बनेंगे। डिजिटल सत्यापन और जियो-टैगिंग से फर्जी दस्तावेजों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।”





