नई दिल्ली, 13 जनवरी 2026
केंद्र सरकार ने देश की प्रमुख Quick Commerce कंपनियों को उनके मार्केटिंग और ब्रांडिंग से ’10 मिनट में डिलीवरी’ के दावे को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। यह फैसला डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा और कार्य स्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया है। श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया की पहल पर Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart और Zomato जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई, जिसमें इन कंपनियों ने इस दावे को हटाने पर सहमति जताई।
ब्लिंकिट ने सबसे पहले कदम उठाते हुए अपनी ऐप, वेबसाइट और विज्ञापनों से ’10 मिनट डिलीवरी’ का टैगलाइन हटा दिया है। कंपनी का मुख्य स्लोगन अब “10,000+ उत्पादों को 10 मिनट में डिलीवरी” से बदलकर “30,000+ उत्पाद आपके दरवाजे पर डिलीवरी” हो गया है। सूत्रों के अनुसार, जीप्टो, स्विगी और अन्य प्लेटफॉर्म भी जल्द ही इसी तरह के बदलाव करेंगे।
यह निर्देश केवल विज्ञापन और ब्रांडिंग पर लागू है, न कि डिलीवरी की आंतरिक प्रक्रिया पर। कंपनियां तेज़ डिलीवरी जारी रख सकती हैं, लेकिन अब वे 10 मिनट की सख्त समय सीमा का प्रचार नहीं कर सकेंगी। सरकार का मानना है कि ऐसे दावे डिलीवरी कर्मियों पर अनावश्यक दबाव डालते हैं, जिससे ट्रैफिक में लापरवाही से वाहन चलाने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।
Quick Commerce गिग वर्कर्स की चिंताएं और हड़ताल
क्विक कॉमर्स सेक्टर की तेज़ ग्रोथ के साथ ही डिलीवरी कर्मियों की समस्याएं भी सामने आई हैं। पिछले कुछ महीनों में गिग वर्कर्स यूनियनों ने बार-बार शिकायत की कि 10 मिनट की समय सीमा के कारण उन्हें ट्रैफिक नियम तोड़ने पड़ते हैं, जिससे जान का जोखिम बढ़ता है। दिसंबर 2025 के अंत में न्यू ईयर ईव पर देशव्यापी हड़ताल हुई, जिसमें लाखों डिलीवरी पार्टनर्स ने बेहतर वेतन, सोशल सिक्योरिटी और 10 मिनट डिलीवरी मॉडल को खत्म करने की मांग की।
यूनियनों का कहना है कि ऐसे टाइट टाइमलाइन से कर्मियों की रेटिंग गिरती है, अगर वे देरी करते हैं, तो इनसेंटिव कट जाते हैं। कई मामलों में दुर्घटनाएं हुईं, जहां डिलीवरी बॉयज की जान गई। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को संसद में उठाया और इसे गिग वर्कर्स की जीत बताया। उन्होंने कहा, “यह दबाव वास्तविक और खतरनाक है। केंद्र का यह कदम लाखों डिलीवरी कर्मियों के लिए बड़ा राहत है।”
Quick Commerce कंपनियों का पक्ष
क्विक कॉमर्स कंपनियां लंबे समय से दावा करती रही हैं कि 10 मिनट डिलीवरी डार्क स्टोर्स की घनी नेटवर्क से संभव है, न कि कर्मियों को तेज़ चलाने के दबाव से। जोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल ने पहले कहा था कि डिलीवरी पार्टनर्स को तेज़ ड्राइविंग के लिए दंडित नहीं किया जाता। हालांकि, सरकार और यूनियनों का मानना है कि विज्ञापन में ऐसे दावे अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाते हैं।
ब्लिंकिट के संस्थापक अलबिंदर धींडसा ने बदलाव को स्वीकार करते हुए कहा कि कंपनी कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सेक्टर की परिपक्वता का संकेत है। अब कंपनियां “तेज़ डिलीवरी” या “डोरस्टेप डिलीवरी” जैसे सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करेंगी।
Quick Commerce सेक्टर पर प्रभाव
भारत का क्विक कॉमर्स मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है। 2025 में यह करीब 50,000 करोड़ रुपये का था और 2027 तक 1-1.5 लाख करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। ऑनलाइन ग्रॉसरी सेगमेंट 40-50% की दर से बढ़ रहा है। इस सेक्टर में ब्लिंकिट, जीप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट प्रमुख खिलाड़ी हैं।
यह निर्देश सेक्टर की प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि 10 मिनट डिलीवरी इन कंपनियों की यूएसपी थी। अब फोकस उत्पादों की विविधता, गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर शिफ्ट होगा। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इससे पारंपरिक फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स जैसे स्विगी और जोमैटो को फायदा हो सकता है, जो पहले से ही 30-45 मिनट की डिलीवरी पर फोकस करते हैं।
हालांकि, आलोचक कहते हैं कि केवल ब्रांडिंग बदलने से ग्राउंड लेवल पर दबाव कम नहीं होगा। अगर आंतरिक टारगेट वही रहेंगे, तो कर्मियों की स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं आएगा। सरकार ने कंपनियों से सड़क सुरक्षा नियमों का सख्त पालन और कर्मियों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा है।
Quick Commerce आगे की राह
श्रम मंत्रालय गिग इकोनॉमी के लिए व्यापक नियम बनाने पर काम कर रहा है। इसमें सोशल सिक्योरिटी, बीमा और न्यूनतम वेतन शामिल हो सकते हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने पहले ही Quick Commerce कंपनियों से उनके दावों के सबूत मांगे थे।
यह कदम दिखाता है कि सरकार तेज़ आर्थिक विकास के साथ-साथ श्रमिकों के अधिकारों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है। डिलीवरी कर्मी, जो महामारी के दौरान आवश्यक सेवा प्रदान करते रहे, अब अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सेक्टर को अधिक सस्टेनेबल बनाएगा।
उपभोक्ताओं के लिए यह मतलब है कि अब डिलीवरी थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन सुरक्षित होगी। आखिरकार, कोई उत्पाद इतना जरूरी नहीं कि उसके लिए किसी की जान जोखिम में डाली जाए।
