यमन के तीसरे सबसे बड़े शहर ताइज के एक रिहायशी इलाके पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने हमला किया, जिसमें दो किशोरियों की मौत हो गई। मंगलवार को हुए इस हमले ने देश में बढ़ते संघर्ष के बीच ताइज के आम नागरिकों पर मंडरा रहे खतरों की ओर एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया है। यह शहर लंबे समय से हमलों और घेराबंदी का सामना कर रहा है।
ताइज की घेराबंदी और बढ़ती कीमतें
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने मंगलवार को कहा कि हूती विद्रोहियों ने ताइज की बड़े पैमाने पर घेराबंदी कर रखी है, जिसके कारण शहर का संपर्क अधिकांश प्रमुख मार्गों से कट गया है और यहां के नागरिक ‘‘गंभीर खतरे’’ में हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम यमन में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस शहर की घेराबंदी के कारण वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई हैं। इसके कारण कई निवासी भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं से वंचित हो गए हैं।
सैन्य शिविर पर हमले में 73 सैनिकों की मौत
यमन सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मंगलवार को ताइज पर हुआ यह हमला सरकारी सैन्य शिविर पर हूती विद्रोहियों के हमले के ठीक एक दिन बाद हुआ। उस हमले में 73 जवानों की मौत हो गई थी। इनमें अधिकांश नए रंगरूट शामिल थे। शबवा के गवर्नर अवध इब्न अल-वज़ीर ने बताया कि रंगरूटों की उम्र 18 से 20 वर्ष के बीच थी। ईरान समर्थित विद्रोहियों ने दक्षिणी प्रांत शबवा में अल-आलम प्रशिक्षण शिविर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया था। हमले में 200 से अधिक रंगरूट घायल भी हुए हैं।
संघर्ष का नया दौर
सोमवार को हुआ यह हमला यमन में हाल के दिनों में तेज हुए संघर्ष का हिस्सा है। हिंसा का यह नया दौर जुलाई में शुरू हुआ जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन की सरकार और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन की सेनाओं ने हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों से 2022 में हुआ युद्धविराम समझौता टूट गया था।
हूतियों ने सऊदी अरब पर भी मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए हैं। अमेरिका से मिले अत्याधुनिक हथियारों के बावजूद सऊदी अरब को इन हमलों का मुकाबला करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
ताइज की घेराबंदी और लगातार हमलों से शहर के नागरिकों की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।
